अनिद्रा (नींद ना आना) की बेस्ट 10 होम्योपैथिक व आयुर्वेदिक दवाएं

अनिद्रा (नींद ना आना) की बेस्ट 10 होम्योपैथिक व आयुर्वेदिक दवाएं

अनिद्रा की होमियोपैथिक चिकित्सा…

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1 अनिद्रा की होमियोपैथिक चिकित्सा…

१. सिमिसिफ्युगा (Cimicifuga)-

  • इसका दूसरा नाम एक्टिया ऐसिमोसा भी है। शक्ति 3x, 30 होमियोपैथिक में कॉफिया को नींद की अच्छी दवा माना जाता है। यह उसी के समकक्ष का दवा है। खासकर छात्र, छात्राओं को सिरदर्द के कारण नींद न आये तो पहले इसे इस्तेमाल करें।

२. कॉकुलस इण्डि. (Coculus Indicus 3x,30)-

  • अधिक दिनों तक जागने के कारण, यदि अनिद्रा की शिकायत हो तो इसके सेवन से लाभ होता है। अस्पताल की नर्स, डॉक्टर, ट्रक ड्राईवर या फैक्ट्रियों में रात को कार्य करने वालों को दें। पूर्ण लाभ होगा।

३. कॉफिया क्रूडा (Coffea Cruda 6 से 200)-

  • 6 से 200 शक्ति तक अधिक फलदायी है। होमियोचिकित्सक इसे अनिद्रा की पेटेण्ट औषधि मानकर प्रयोग करते हैं, सफलता भी मिलती है।
  • भविष्य के कारण यदि नींद नहीं आ रही हो तो इसके प्रयोग से नींद आने लगती है। दिन में 6 या 30 शक्ति और रात को सोने से पूर्व 200 शक्ति की एक मात्रा नित्य दे।

४. ग्रैटियोला ऑफि. (Gratiola offi.)-

  • 3x.3.30 अनिद्रा की यह भी अच्छी दवा है।

५. हायोसायमस नाईगर (Hyoscyamus Nia) –

  • 6 से 200 के बीच की शक्तियाँ अधिक उपयोगी हैं। अनिद्रा है, नींद नहीं आती हैं परन्त इसका कारण क्या है ? पता नहीं चलता, इस प्रकार के रोगियों में यह अधिक प्रभावशाली है।

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६. ओपियम (Opium) –

  • 30 और 200 शक्तिः – बिछावन पर लेटे, देर तक जागे रहना, फिर भी नींद न आये। यदि आँखें लगे भी तो थोड़ी सी खडखडाहट आदि की आवाज़ से नींद खल जाती है। ऐसे लक्षण जहाँ हो, इसका प्रयोग करें।

७. पैसिफ्लोरा इन्कारनेटा (Passiflora Incarnata)-

बच्चों एवं वृद्धों की अनिद्रा में अधिक उपयोगी है। यद्यपि लाभदायी प्रत्येक आय के रोगियों में है।

  • 5 से 6 बूंद नित्य 3 बार पूर्ण लाभ होने तक दें। लाभ हो जाने पर मात्र रात में सोने से पहले, कुछ दिन तक सेवन करायें। थोड़े पानी में मिलाकर दें।

८. पौलीनिया (Paullinia.)6-

  • अस्थिरता के साथ अनिद्रा की शिकायत हो तो इसका प्रयोग करें।

९. राऊल्फिया सपेन्टिना (Rauwolfia Sorpentina) Q-

  • यह निद्रा लाने वाली सर्वदोष रहित औषधि है। किसी भी आयु के बच्चों, वृद्धों एवं स्त्रियों को दी जा सकती है।
  • 5 से 30 बूंद तक 3 बार पानी में मिलाकर दें।

१०. एवेना सैट (Avena sat.) Q-

  • 5 से 20 बूँद गरम पानी में मिलाकर नित्य 3 बार लेने से अनिद्रा दूर हो जाती है।
  • यह स्नायुविक शक्ति एवं शारीरिक शक्ति, दोनों प्रदान करने वाली औषधि है। स्नायतंत्र के सबल हो जाने से शरीर की सभी क्रियायें सचारू रूप से चलने लगती हैं। अतः मन और तन दोनों के लिये उत्तम है।

अनिद्रा की बायोकेमिक चिकित्सा…

  1. फेरम फॉस (Ferrum Phos.)-12x
  2. कैलि फॉस (Kali phos.)-30x
  3. नेट्रम म्यूर (Nat. Mur)-30x

तीनों को समभाग मिला 1 ग्राम यह चूर्ण गरम पानी के साथ या गरम पानी में घोलकर नित्य 3 बार लेने से अनिद्रा दूर करने में काफी लाभ मिलता है।

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अनिद्रा की आयुर्वेदिक चिकित्सा…

१. निद्रोदय रस –

  • 2 गोली नित्य रात को सोने से ठीक पहले जल के साथ दें।

२. बृहत् चिन्तामणि रस –

  • 1 गोली सुबह-शाम शहद में चटाकर ऊपर से बला(बरियार) की जड़ का क्वाथ पिला दें।

३. लोकनाथ रस (बृहत्) –

  • 125 से 450 मि. ग्रा. की मात्रा में नित्य दो बार मधु और पीपल चूर्ण के साथ दें। ऊपर से 60 मि. ली. तक गोमूत्र पिला दें या गुड़ और हरीतकी चूर्ण के साथ दें।

४. सर्पगन्धाघन बटी –

  • इसके सेवन से मस्तिष्क को आराम मिलता है। अतः तनाव एवं तनाव से उत्पन्न किसी तरह के मानसिक रोग, अनिद्रा आदि में पूर्ण उपयोगी है। नित्य रात को सोने से पूर्व 1 गोली जल के साथ दें।

५. अर्क दशमूल –

  • यह स्नायुतंत्र को शक्ति देने वाली, अनिद्रा को दूर करने वाली उत्तम औषधि है। 10 से 100 मि. ली. तक नित्य 4 बार अकेले या अन्य वात-शामक औषधि के साथ दें।

६. अर्क गावजवान –

  • यह मस्तिष्क विकारों को दूर करने वाली, हृदय को बल देने वाली एवं उत्तम हृदयोल्लासक औषधि है। इसके सेवन से अच्छी नींद आती है। 30 मि.ली. नित्य सुबह-शाम या अश्वगंधारिष्ट के साथ सेवन करायें।

७. महाल क्षादि तैल –

  • इस तेल की सर्वांगमालिश से नींद अच्छी आती है।

८. मांस्यादि क्वाथ –

  • यह स्नायुतंत्र की उत्तम औषधि है। इसमें जटामांसी, असगन्ध, खरासानी अजवायन के बीज आदि के मिश्रित चूर्ण के योग है। 10 ग्राम चूर्ण 100 मि. ली. जल में पकायें। 40 मि. ली. शेष रहने पर उतार कर छानकर नित्य सुबह शाम पिलायें। अनिद्रा की शिकायत दूर होगी।

आयुर्वेद की पेटेण्ट नींद की औषधियाँ…

1. सेर्पिना टेबलेट्स (Serpina Tablets)-

यह हिमालय ड्रग्स की एक अच्छी निद्राकारक दवा है। इसमें सर्पगंधा का योग होने से कुछ अधिक प्रभावी है। नित्य 1 गोली 3 बार दें।

  1. सीरप शंखपुष्पी (झण्डू आयुर्वेदिक फार्मास्यूटिकल) – इसमें शंखपुष्प आदि का योग है। स्नायुविक शक्तिवर्धक एवं निद्राकारक दवा है। एक चम्मच (5 मि. ली.) नित्य सुबह शाम दें।
  2. मीमोरेक्स (Memorex) – सामान्य अनिद्रा में 1 कैप्सूल सुबह और 1 कैप्सुल रात में सोने से पहले दें। यह हिन्दुस्तान कं. की बाज़ार में उपलब्ध है। सिरदर्द सहित अनिद्रा में भी उपयोगी।
  3.  बाइविटा Bivita –(डेप कं.) की एक टिकिया नित्य दो बार दें। तनाव से उत्पन्न अनिद्रा की यह उत्तम दवा है।
  1. ब्रेन टैब (Brain Tab) – यह वैद्यनाथ के अनुभूत योगों में से एक है। वयस्क को 2 टिकियां नित्य दिन में दो बार।
  2. बेनोमेड Brainomed (सूर्या कं.) – चिन्ता से उत्पन्न अनिद्रा की अच्छी औषधि है। 2 टिकियाँ नित्य 3 बार। इस का सीरप भी उपलब्ध है जो कि वयस्क को 2 चाय चम्मच नित्य 3 बार निर्धारित है।
  3. बिसेरपेक्स (Biserpex) (हर्बोमेड कं.)-2 टिकियाँ नित्य 3 बार। इससे उच्च रक्तचाप जनित अनिद्रा दूर हो जाती है, रक्तचाप भी सामान्य हो जाता है।
  • नवशक्ति कं. की समिक्स (Sarpamix)
  • सबनाम कं. की सोगादेसारन (Sogadesaran)
  • बैद्यनाथ की एक्स्ट्रेस (Extress) आदि इसी के समकक्ष हैं।
  1. मेधावी Mdhavee (कोरल कं.)- किसी भी स्नायुविक रोग के साथ या मिर्गी सदृश रोग के साथ यदि अनिद्रा हो तो इसका सेवन करायें। 2 टिकियाँ नित्य 3 बार।
  2. स्ट्रेसकॉम Stresscom (डाबर)- अवसाद (Depression) जनित अनिद्रा की उत्तम औषधि। वयस्क को 1 से 2 कैप्सूल नित्य 2 बार दूध के साथ दें।
  3. प्रशान्त कैप्सूल Prasant Capsule (स्वास्तिक) – चिन्ता की उग्रता के कारण (घोर चिंता में होने से) यदि नींद न आ रही हो तो नित्य रात को 2 कैप्सूल सेवन करायें।

अस्वीकरण (disclaimer)… 

  • इस लेख की सामग्री व्यावसायिक चिकित्सा सलाह(professional medical advice), निदान(diagnosis) या उपचार(ट्रीटमेंट) के विकल्प के रूप में नहीं है।
  • चिकित्सीय स्थिति के बारे में किसी भी प्रश्न के लिए हमेशा चिकित्सीय(doctor कंसल्टेशन) सलाह लें।
  • उचित चिकित्सा पर्यवेक्षण(without proper medical supervision) के बिना अपने आप को, अपने बच्चे को, या किसी और का  इलाज करने का प्रयास न करें।

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  • “अनिद्रा (नींद ना आना) की बेस्ट 10 होम्योपैथिक व आयुर्वेदिक दवाएं” के लेखक: डॉ. वी .के. गोयल आयुर्वेदाचार्य B.A.M.S. M.D.(AM)
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