constipation meaning in hindi

constipation meaning in hindi- कब्ज़ के कारण, लक्षण व् इलाज़ के विकल्प

Constipation Meaning in Hindiकब्ज़ की शिकायत 

constipation meaning in hindi: कब्ज का अर्थ है किसी व्यक्ति के लिए अपनी बड़ी आंत को खाली करने में कठिनाई या कठोर मल का गुजरना या मल को ठीक से पास करना बहुत मुश्किल होता है।

यह जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है और जीवनशैली में बदलाव के साथ कुछ घरेलू उपचारों की मदद से आप कब्ज से छुटकारा पा सकते हैं।

  • इसके पीछे कई कारण होते हैं जैसे आंत में मल का बहुत धीमी गति से आना और धीमी गति से चलने के कारण बड़ी आंत अधिक पानी सोख लेती है और मल सख्त हो जाता है।

कभी-कभी कब्ज का कारण बहुत गंभीर होता है जैसे आंतों में रुकावट उस समय रोगी को तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

ज्यादातर समय कब्ज का मुख्य कारण आहार में फाइबर तथा पानी की कमी होता है।


कब्ज के लक्षण (Constipation symptoms in hindi)

कब्ज़ से पीडित व्यक्ति को निम्न लक्षण हो सकते है जैसे कि…

  • कठोर, सूखे या ढेलेदार मल का निकलना
  • स्टूल (latrine) पास करते समय बहुत जोर लगाना
  • सामान्य से कम मात्रा में मल आना
  • मल पास करते समय दर्द होना 
  • स्टूल पास करना मुश्किल होना 

कुछ अन्य लक्षण…

  • पेट फूलना (flatulence)
  • जी मिचलाना (nausea)
  • पेट में ऐंठन महसूस होना
  • आंतो मे सूजन (intestinal inflammation)
  • भूख में कमी (anorexia)
  • पेट दर्द (pain abdomen)
  • पेट की परेशानी (abdominal discomfort)

कब्ज की शिकायत हमेशा बने रहना इतियादी 


कब्ज के नुकसान (complications of constipation in hindi)

अधिकांश समय कब्ज एक गंभीर चिकित्सा स्थिति नहीं होती है लेकिन कभी-कभी कब्ज के कारण शरीर में कई अन्य गंभीर जटिलताएं भी आ जाती हैं जैसे कि…

गुदा मे चीर जैसा जख्म (anal fissure), एक ऐसी स्थिति जिसमें गुदा क्षेत्र में एक छोटे चीरे जैसा घाव हो जाता है
तनाव के कारण मलाशय से खून बहना (anal bleeding)
कब्ज के कारण रक्त वाहिकाओं में सूजन के कारण बवासीर (piles) होना
सूखे मल के ठहराव तथा संग्रह के कारण मलाशय में रुकावट जो यांत्रिक रुकावट (mechanical obstruction) का कारण बन सकती है 

  • इन जटिलताओं के बावजूद, कुछ अन्य हैं जैसे चिंता, तनाव, अवसाद जो जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं और उन्हें तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

“constipation meaning in hindi” पढ़ते रहिये…


कब्ज के कारण (causes of constipation in hindi)

आहार फाइबर की कमी…

  • सही मात्रा मे पानी के साथ साथ आहार मे फाइबर की उचित मात्रा होना मल त्याग को नियंत्रित करने के लिए बहुत आवश्यक है तथा जो लोग अच्छी मात्रा में आहार मे फाइबर का सेवन करते हैं उन्हें कब्ज की संभावना कम होती है।

कुछ खाद्य स्रोत जैसे फल, सब्जियां, मेवे, साबुत अनाज, छोले, दाल तथा अन्य फलियां आहार मे फाइबर की अच्छी मात्रा में होती हैं।

इसके अलावा कुछ खाद्य पदार्थ जैसे अंडे, मांस, पनीर और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य (highly processed foods) पदार्थ जैसे सफेद ब्रेड, फास्ट फूड और चिप्स में बहुत कम मात्रा में फाइबर होता है जो कब्ज की समस्या को बढ़ाता है।

शारीरिक गतिविधि की कमी…

  • शारीरिक गतिविधि की कमी से भी कब्ज होता है। 2013 में किया गया एक अध्ययन इस तथ्य का समर्थन करता है।

इसमें यह पाया गया है कि जो लोग कुर्सी या बिस्तर पर बैठे हुए कई सप्ताह या दिन बिताते हैं, उन्हें उन लोगों की तुलना में कब्ज का अधिक खतरा हो सकता है जो हर दिन अधिक शारीरिक गतिविधि करते हैं।

कुछ दवाएं…

कई दवाएं हैं जो कब्ज की समस्या को बढ़ा देती हैं जैसे कि…

  • ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट्स (Tricyclic antidepressants) – इमिप्रामाइन, एमिट्रिप्टिलाइन
  • ओपिओइड दर्द निवारक (Opioid pain relievers) – कोडीन, ऑक्सीकोडोन, हाइड्रोमोफोन
  • आक्षेपरोधी (Anticonvulsants) जैसे- कार्बामाज़ेपिन, फ़िनाइटोइन
  • एंटासिड युक्त एल्युमिनियम (Aluminium-containing antacids) – एम्फोजेल, बेसलजेल
  • कैल्शियम युक्त एंटासिड- टम्स (Tums)
  • कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स- डिल्टियाज़ेम, निफ़ेडिपिन
  • कुछ मूत्रवर्धक (diuretics) – फ़्यूरोसेमाइड, हाइड्रोक्लोरोथियाज़ाइड्स

उम्र बढ़ने…

  • उम्र बढ़ने के साथ कब्ज की समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है।

उचित कारण अभी भी अज्ञात है लेकिन ऐसा माना जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ आंतों की गति धीमी हो जाती है तथा आहार मे फाइबर की कमी के साथ अन्य चिकित्सीय स्थितियां इस समस्या को बढ़ा देती हैं।

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IBS की समस्या-

  • irritable आंत्र सिंड्रोम (Irritable bowel syndrome), एक कार्यात्मक मनोवैज्ञानिक आंतों की कठिनाई की स्थिति भी कब्ज की समस्या को बढ़ा देती है।

जो लोग IBS से पीड़ित हैं, उनमें निम्न लक्षणों का अनुभव हो सकता है…

  • पेट का फूलना (flatulence)
  • आंतो मे सूजन (colitis)
  • पेट में दर्द (pain abdomen)
  • मल की consistency में परिवर्तन
  • मल त्याग की आवृत्ति (frequency) में परिवर्तन

इस समस्या (IBS) में कब्ज की समस्या में उतार-चढ़ाव होता है। कभी-कभी दस्त या ढीले मल की शिकायत भी हो सकती हैं।

जुलाब (Laxatives) का अति प्रयोग…

  • कब्ज को ठीक करने के लिए लंबे समय तक laxatives का अधिक सेवन करने से इसकी आदत बन जाती है। ऐसी स्थितियों में जुलाब (laxatives) के बिना मल त्याग करना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि ऐसी स्थिति मे कोई भी शारीरिक और मानसिक रूप से जुलाब पर निर्भर हो जाता है।

कुछ लोग कब्ज की हल्की समस्या मे भी जुलाब का प्रयोग करते हैं जो बिलकुल भी सही नहीं हैं।

रेचक (laxatives) के अति प्रयोग से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, आंतरिक अंग क्षति या निर्जलीकरण (dehydration) भी हो सकता है।

इसलिए रेचक लेने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना बहुत जरूरी है।

पानी कम पीना…

  • कब्ज की समस्या से छुटकारा पाने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी या अन्य तरल पदार्थ जैसे फलों का रस, सब्जियों का सूप और क्लियर सूप पीना बहुत जरूरी है।

कैफीनयुक्त सोडा, कॉफी और शराब जैसे कुछ तरल पदार्थ कब्ज की समस्या को बढ़ा देते हैं इसलिए इनके सेवन से बचें।

चिकित्सकीय आंतों की समस्या (medical intestinal problems)…

कुछ स्वास्थ्य समस्याएं जो आंत को प्रभावित करती हैं, मल त्याग करने में भी कठिनाई होती है जिससे कब्ज की समस्या होती है जैसे कि…

  • विपुटीशोथ (Diverticulitis)  
  • घाव का निशान (scar tissue)
  • कैंसर ट्यूमर
  • बृहदान्त्र में सख्ती (stricture in the colon)
  • सूजा आंत्र रोग (inflammatory bowel disease)
  • हरनिया

कुछ अन्य चिकित्सीय स्थितियां जैसे कि…

  • रीढ़ की हड्डी में चोट, मल्टीपल स्केलेरोसिस, स्ट्रोक, पार्किंसंस रोग आदि जैसे न्यूरोलॉजिकल मुद्दे।
  • पाचन संबंधी समस्याएं जैसे सीलिएक रोग, बृहदान्त्र में पुरानी सूजन, आईबीडी आदि।
  • कीमोथेरेपी जैसे कैंसर का इलाज
  • अन्य चयापचय स्थितियां जैसे मधुमेह, hypercalcemia , हाइपोथायरायडिज्म और यूरीमिया आदि।

कभी-कभी कब्ज की समस्या नवजात शिशुओं, छोटे शिशुओं तथा गर्भावस्था में भी हो जाती है।

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कब्ज़ का इलाज (treatment of constipation in hindi)

जीवनशैली में कुछ बदलाव की मदद से हल्के से मध्यम (moderate) कब्ज की समस्या आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाती है जैसे कि-

  • खूब पानी पीना
  • अधिक मात्रा मे फाइबर खाना
  • रोजाना अधिक शारीरिक गतिविधि करना आदि।
  • बिना किसी तनाव या रुकावट के सभी को मल त्याग करने के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए
  • मल त्याग की तात्कालिकता (urgency) को नज़रअंदाज़ न करें
  • कब्ज से छुटकारा पाने के लिए हल्के घरेलू नुस्खे अपनाएं

इन कोशिशों के बावजूद अगर कब्ज की समस्या बनी रहती है तो आपको इसके इलाज़ के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

कब्ज के सही कारण का पता लगाने के लिए तथा निदान के बाद इसका उचित इलाज करने के लिए आपका डॉक्टर एक उचित शारीरिक जांच के साथ-साथ अन्य जांच भी करेगा।

अन्य उपाय…

हल्के जुलाब (mild laxatives) का प्रयोग…

कब्ज से पीड़ित व्यक्ति हल्के जुलाब तथा मल सॉफ़्नर (stool softener) का प्रयोग कर सकता है जो कब्ज से छुटकारा पाने के लिए medical स्टोर्स पर उपलब्ध हैं। उदाहरण इस प्रकार हैं जैसे कि…

  • उत्तेजक (stimulants) पदार्थ- जो आंतों की मांसपेशियों के संकुचन को लयबद्ध रूप से ट्रिगर करते हैं। एक उदाहरण सेनेकोट (senekot) है।
  • मल सॉफ़्नर (stool softeners) – सर्फ़क और कोलाका (surfak and colaca) जैसे जो मल को नरम करते हैं।
  • लुब्रिकेटिंग एजेंट- फ्लीट (Fleet a mineral oil) एक खनिज तेल की तरह आंत में मल की सुचारू गति के लिए।
  • फाइबर युक्त सप्लीमेंट- जिसे फाइबरकॉन (Fiber-Con) जैसे बल्क-फॉर्मिंग laxative भी कहा जाता है।

कब्ज़ के लिए यह सबसे सुरक्षित विकल्प है। आप इसे ऑनलाइन खरीद सकते हैं।

आसमाटिक एजेंट (osmotic agents)-

जो आंत में मल को हाइड्रेट करते हैं और इसके संचलन को आसान बनाते हैं।

यदि इन सभी उपायों से कब्ज की समस्या ठीक नहीं होती है तो आपके डॉक्टर को प्रभावित मल को हाथ से या शल्य चिकित्सा द्वारा निकालने की आवश्यकता पड़ सकती है।

आंत में किसी प्रकार की रुकावट या कब्ज के सटीक कारण का पता लगाने के लिए आपके डॉक्टर को सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन या एक्स-रे जैसी आगे की जांच करने की आवश्यकता हो सकती है।


कब्ज दूर करने के प्राकृतिक उपाय (home remedies for constipation in hindi)

फाइबर की मात्रा बढ़ानी चाहिए…

आपको सब्जियों, ताजे फल तथा गढ़वाले अनाज (Fortified cereals) के रूप में रोजाना 25 से 30 ग्राम फाइबर जरूर खाना चाहिए।

  • यह कब्ज से छुटकारा पाने का सबसे अच्छा तरीका है तथा मल को नरम बनाने व उसे आसानी से आंतो से गुजरने में मदद कर सकता है।
  • नाश्ते के अनाज (breakfast cereals) पर एक बड़ा चम्मच गेहूं का चोकर (wheat bran) छिड़का जा सकता है या आप इसे दही या स्मूदी में मिला सकते हैं।
  • प्रतिदिन शौचालय की अच्छी आदतों का पालन करना
  • रोजाना सुबह जल्दी उठकर पर्याप्त मात्रा में गर्म पानी पिएं
  • प्रतिदिन नियमित शारीरिक गतिविधि करना

मल पास करने की इछा (urgency to pass stool) होने पर तुरंत मल त्याग करना


कब आपको डॉक्टर के परामर्श करना चाहिए…

यदि ये लक्षण कब्ज के साथ विकसित होते हैं तो आपको अपने डॉक्टर से परामर्श तुरंत करना चाहिए जैसे कि…

  • बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक से कब्ज़ शुरू हो जाना
  • गुदा से खून बहना
  • रक्त के साथ मल त्याग होना
  • पेट में तेज दर्द
  • बहुत मुश्किल से गैस पास करना
  • अप्रत्याशित रूप से वजन घटना
  • उल्टी
  • कब्ज मे किसी भी दवा या घरेलू उपचार का फायदा ना होने पर

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कब्ज दूर करने के आयुर्वेदिक नुस्खे (ayurvedic home remedies for constipation in hindi)

आयुर्वेद एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है जो आत्मा, मन और शरीर के बीच संतुलन बनाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में पूरक और एकीकृत स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय केंद्र द्वारा अनुमानित लगभग 2,40,000 लोग आयुर्वेदिक चिकित्सा का उपयोग कर रहे हैं।

  • आयुर्वेद के अनुसार, कब्ज का मुख्य कारण वात दोष असंतुलन है जिसके कारण मल सख्त व् शुष्क हो जाता है।

तो कब्ज के इलाज के लिए वात दोष शांत करने वाले खाद्य पदार्थ, स्वस्थ जीवन शैली के साथ हर्बल सप्लीमेंट की सिफारिश आयुर्वेद में की जाती है। जैसे कि…

1. त्रिफला का प्रयोग…

कब्ज के साथ-साथ तीन फलों से बनी पाचन संबंधी अन्य समस्याओं को ठीक करने के लिए आयुर्वेद में यह सबसे अच्छी दवा है जिसमे…

  • हरीतकी (टर्मिनलिया चेबुला)
  • बिभीतकी (टर्मिनलिया बेलेरिका)
  • आमलाकी ( Emblica Officinalis ) प्रमुख रूप से होते है 

2011 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि बिना किसी अप्रिय दुष्प्रभाव के 79% लोगों ने त्रिफला के उपयोग से अपने कब्ज के लक्षणों में दो सप्ताह की अवधि के भीतर सुधार किया।constipation meaning in hindiत्रिफला का उपयोग पाउडर के रूप में या कैप्सूल के रूप में किया जा सकता है। त्रिफला चूर्ण 3 से 5 ग्राम की मात्रा में रात को गुनगुने पानी के साथ लेने से पुरानी कब्ज दूर हो जाती है।

  • त्रिफला के 2 कैप्सूल भोजन के आधे घंटे बाद या बाद में दिन में 2 बार गुनगुने पानी के साथ लेने से पुरानी कब्ज से राहत मिलती है।

इसका पाउडर, टैबलेट और कैप्सूल व्यापक रूप से ऑनलाइन के साथ-साथ काउंटर पर भी उपलब्ध हैं।constipation meaning in hindiकब्ज के साथ-साथ यह रक्तचाप को भी कम करता है तथा वजन कम करने में मदद करता है।

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2. सना (Senna)…

  • एक अद्भुत जड़ी बूटी जो रेचक (laxative) के रूप में कार्य करती है, आयुर्वेद में कब्ज व् अन्य पाचन विकारों जैसी समस्याओं को ठीक करने के लिए कई वर्षों से इसका उपयोग किया जाता रहा है।

खाद्य और औषधि प्रशासन (food and drug administration) ने भी इस जड़ी बूटी को एक रेचक तथा इसके काउंटर उपयोग के रूप में अनुमोदित (approved) किया है।constipation meaning in hindiइस जड़ी बूटी में सेनोसाइड्स (Sennosides) नामक एक यौगिक होता है जो आंत की परत को उत्तेजित करता है तथा केवल 6 से 12 घंटों में कब्ज से राहत देता है।

  • कुछ लोगों को इस जड़ी बूटी को लेते समय पेट में दर्द व् ऐंठन महसूस होती है।

अप्रिय और अवांछित प्रतिकूल प्रभावों (unpleasant and unwanted adverse effects) से बचने के लिए इस जड़ी बूटी का उपयोग उचित खुराक में और आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श के बाद थोड़े समय के लिए किया जाना चाहिए।

कुछ स्वास्थ्य परिस्थितियों में जड़ी बूटी सना लेने की सिफारिश नहीं की जाती है जैसे कि…

  • निर्जलीकरण (dehydration)
  • नासूर के साथ बड़ी आंत में सूजन (ulcerative colitis)
  • क्रोहन रोग (crohn disease)
  • दिल के रोग
  • पेट में सूजन
  • अर्श (piles)
  • पथरी
  • इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन
  • गुदा आगे को बढ़ाव (anal prolapse)
  • आंतों में रुकावट (Intestinal obstruction)

2 साल से कम उम्र के बच्चे आदि।


3. हिमालय हर्बोलैक्स…

यह कब्ज के लिए एक और बढ़िया उपाय है जिसमें हरीतकी और त्रिवृथ नामक एक अन्य जड़ी बूटी (ऑपरकुलिना टरपेथम / इपोमिया टरपेथम) होती है जिसमें anti-inflammatory, जीवाणुरोधी तथा साथ ही रेचक (laxative) गुण होते हैं।

  • फिर भी, इस दवा की प्रभावशीलता पर पर्याप्त अध्ययन नहीं हुआ है लेकिन यह पुष्टि की गई है कि हरीतकी और त्रिवृथ के बहुत ही बढ़िया रेचक (laxative) प्रभाव हैं।

बाल चिकित्सा उपयोग के लिए इस हर्बल पूरक की सिफारिश नहीं की जाती है।


आयुर्वेदिक बस्ती (एक प्रकार का एनीमा)

पंचकर्म आयुर्वेद में मानव शरीर को साफ करने के लिए एक बहुत प्रसिद्ध स्वास्थ्य प्रोटोकॉल है जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलता है।

  • पंचकर्म का अर्थ है शरीर को साफ करने के पांच तरीके जिसमें एक बस्ती कर्म है जिसे आयुर्वेदिक एनीमा भी कहा जाता है जिसमें एक विशेष प्रकार के हर्बल मिश्रण जिसमें घी और तेल होता है, एक विशेष एनीमा उपकरण के माध्यम से मलाशय में डाला जाता है तथा मलाशय को ठीक से साफ करता है।
  • इस हर्बल मिश्रण को मलाशय में कुछ समय रखने के बाद आप इस मिश्रण को शौचालय में latrine के रास्ते से निकाल देंते है।

इस तरह कब्ज की समस्या का प्रभावी ढंग से इलाज किया जा सकता है।

आयुर्वेदिक एनीमा के अति प्रयोग से गुदा में चोट लग सकती है और इसे आयुर्वेदिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की देखरेख में किया जाना चाहिए।


आयुर्वेदिक मसाज थेरेपी…

  • आयुर्वेद में कुछ विशेष हर्बल औषधीय तेलों का उपयोग कई स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक करने के लिए कई वर्षों से मालिश करने के लिए पूरे शरीर पे किया जाता है।

डीप कोलन (Deep Colon) और पेट की मालिश चिकित्सा कब्ज से राहत दिलाने में मदद कर सकती है, यह 2016 में किए गए एक शोध अध्ययन से साबित हुआ है।

पेट की मालिश का उपयोग निम्न चिकित्सा स्थितियों से पीड़ित रोगियों में कब्ज को दूर करने के लिए किया जाता है जैसे कि…

  • Stroke
  • मल्टीपल स्क्लेरोसिस
  • पार्किंसंस रोग तथा ओपिओइड दवाएं लेने वाले लोगों मे।

इन उपायों के बावजूद कुछ आयुर्वेदिक विशेषज्ञ कब्ज से छुटकारा पाने के लिए कुछ खास योग तकनीकों की सलाह देते हैं। कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं…

  • धनुरासन
  • वज्रासन
  • Sarvangasana
  • मत्स्य-इंद्रासन
  • त्रिकोणासन
  • भुजंगासन
  • शलभासन
  • हलासन
  • मयूरासन
  • मंडुकासन आदि।

फिर भी, इसको पूरी तरह समझने के लिए यह पर्याप्त अध्ययन नहीं है कि योग पाचन तंत्र को कैसे प्रभावित करता है, लेकिन नैदानिक ​​परीक्षणों में यह पाया गया है कि यह कब्ज से छुटकारा पाने में योग मदद कर सकता है।


FAQ

Q पेट में कब्ज होने से कौन सी बीमारी होती है?

A कब्ज के कारण पेट में गैस, अफारा, पेट का साफ ना होना, सिर दर्द, बेचैनी, कमजोरी इत्यादि लक्षण महसूस होते हैं लैट्रिन जाने के बाद भी पेट साफ ना होने का एहसास हमेशा बना रहता है


Q कब्ज के लक्षण क्या है?

A प्रमुख लक्षणों में 1 सप्ताह में ज्यादा से ज्यादा तीन बार मल त्याग होना, मल त्याग करते समय पीड़ा होना, पेट में दर्द रहना, पेट में गैस- तेजाब तथा अफारा होना, सूखा ढलेधार मल कष्ट के साथ निकलना इत्यादि कब्ज होने के प्रमुख लक्षण हैं


Q पेट में कब्ज होने पर क्या खाएं?

A कब्ज को दूर करने के लिए फाइबर युक्त आहार जैसे खीरा, मूली, गाजर, पत्ता गोभी, सेब, पपीता, केला इत्यादि फलों तथा सब्जियों का सेवन ज्यादा मात्रा में करना चाहिए


Q कब्ज कहां दर्द करता है?

A कब्ज के कारण पेट में मरोड़ उठने जैसी पीड़ा का अनुभव प्रमुख रूप से होता है साथ ही साथ पेट में ऐठन का अनुभव भी पीड़ित व्यक्ति को हो सकता है


Q कब्ज की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?

A कब्ज के लिए टेबलेट dulcolax 10 mg बहुत ही बढ़िया तथा कारगर दवा है पीड़ित व्यक्ति इस गोली का सेवन रात को सोते समय पानी के साथ कर सकता है


Q मल को तुरंत नरम कैसे करें?

A इसका उपाय ज्यादा मात्रा में हल्का गर्म पानी पीने से हो सकता है साथ ही साथ गर्म दूध में दो चम्मच शुद्ध देसी घी डालकर पीने से भी आंतों में जमा हुआ सख्त मल नरम हो जाता है


Q क्या खाने से कब्ज नहीं होता है?

A फाइबर युक्त आहार का सेवन उचित मात्रा में करने से कब्ज की शिकायत बिल्कुल भी नहीं होती है


Q कब्ज होने पर दूध पीना चाहिए या नहीं?

A आयुर्वेद के अनुसार कब्ज होने पर ठंडा दूध नहीं पीना चाहिए ऐसी स्थिति में उष्ण दूध में अंजीर को उबाल कर या गुड़ डालकर सेवन करने से कब्ज दूर होती है


Q चावल खाने से कब्ज होती है या नहीं?

A जी नहीं चावल में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है इसलिए चावल खाने से कब्ज होना यह बात बिल्कुल भी सही नहीं है


Q कब्ज होने पर कौन सी सब्जी खानी चाहिए?

A कब्ज होने पर घीया, लौकी, परवल, कद्दू, पेठा, गाजर, मूली, शलगम, पालक, गोभी इत्यादि रेशेदार सब्जियों का प्रयोग ज्यादा करना चाहिए


Q आंतों में जमा मल कैसे निकाले?

A ईसबगोल का छिलका 10 से 15 ग्राम की मात्रा में गर्म जल में मिलाकर सेवन करने से आंतों में जमा हुआ मल नरम होने लगता है इसके अलावा सिरप क्रीमेफिन प्लस 10 से 15 ml की मात्रा भी आंतों में जमे मल को बाहर निकाल देती है


Q पुरानी से पुरानी कब्ज?

A प्रतिदिन रात को सोते समय 10 से 15 ग्राम ईसबगोल का छिलका गर्म पानी में मिलाकर लेना चाहिए या सोते समय एक गिलास गर्म दूध में दो चम्मच शुद्ध देसी घी के मिलाकर सेवन करने चाहिए या 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण हल्के गर्म जल के साथ रात को सोते समय लेने से पुरानी से पुरानी कब्ज भी दूर हो जाती है


Q कब्ज कब तक रह सकता है?

A कब्ज के ज्यादातर मामलों में घबराने वाली बात कुछ भी नहीं होती परंतु अगर कब्ज का कारण आंतों की किसी बीमारी से जुड़ा है तो यह स्थिति खतरनाक भी हो सकती है इसलिए लंबे समय से चली आ रही कब्ज की समस्या का सही निदान व सही इलाज बहुत जरूरी है


निष्कर्ष (constipation meaning in hindi) 

ज्यादातर मामलों में सामान्य घरेलू उपायों की मदद से कब्ज से छुटकारा पाया जा सकता है आप इसके लिए इसबगोल का छिलका, त्रिफला चूर्ण, अविपत्तिकर चूर्ण, हर्बोलेक्स हिमालया पाउडर या Dulcolax टेबलेट का इस्तेमाल बेफिक्र होकर कर सकते हैं

परंतु अगर इन दवाइयों का सेवन करने के बाद भी कब्ज की समस्या में कोई लाभ नहीं हो पा रहा तो ऐसी स्थिति में इसके निदान के लिए पेट के डॉक्टर से सलाह मशवरा करना बहुत जरूरी है क्योंकि कुछेक आंतों से जुड़ी हुई गंभीर बीमारियां ऐसी भी होती हैं जिनके कारण पीड़ित व्यक्ति में कब्ज की समस्या एक प्रमुख लक्षण के रूप में उत्पन्न होती है

इसलिए अगर कब्ज का कारण कोई बीमारी है तो इसका इलाज जल्दी से जल्दी करवाना चाहिए अन्यथा कब्ज के कारण अनेक प्रकार की अन्य जटिलताएं (उदाहरण के लिए बवासीर) शरीर में उत्पन्न हो सकती हैं

मैंने यहां पर “constipation meaning in hindi” के बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान कर दी है कृपया इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ें तथा आगे शेयर करें


अस्वीकरण (constipation meaning in hindi)

इस लेख की सामग्री पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान, या उपचार के विकल्प के रूप में अभिप्रेत नहीं है।
चिकित्सीय स्थिति के संबंध में किसी भी प्रश्न के लिए हमेशा चिकित्सकीय सलाह लें।
उचित चिकित्सकीय देखरेख के बिना अपना, अपने बच्चे का या किसी और का इलाज करने का प्रयास न करें।

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Information Compiled- by Dr Vishal Goyal

Bachelor in Ayurvedic Medicine and Surgery

Post Graduate in Alternative Medicine MD (AM)

Email ID- [email protected]

Owns Goyal Skin and General Hospital, Giddarbaha, Muktsar, Punjabwriter-

constipation meaning in hindi पढने के लिए धन्यवाद…


सन्दर्भ:

https://health.rajasthan.gov.in/content/raj/medical/en/directorate-of-ayurveda/services/panchakarma-therapy.html- panchakarma for constipation

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