साइटिका बीमारी के लक्षण

साइटिका बीमारी के लक्षण, कारण व् उपचार- Sciatica in Hindi

साइटिका (sciatica) बीमारी के लक्षण: परिचय-आयुर्वेद में इसे ‘गृध्रसी’ तथा अंग्रेजी में सायाटिक (Sciatic Nerves) कहते हैं। यह नितम्बों (hips) से होती हुई टखनों (ankles) तक जाती है। इसमें सूजन होने से पीड़ा होती है। इसलिये गृध्रसी नाड़ी (Sciatic Nerve) के नाम पर ही इसे साइटिका (Sciatica) कहते हैं।

प्रदाह (inflammation) होने से इस रोग मे बहुत पीड़ा होती है। बैठना, उठना, चलना-फिरना भी कठिन हो जाता है।


साइटिका के लक्षण (symptoms of sciatica in hindi)

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कटि स्नायुशूल (sciatica) सामान्यतः 40 से 50 वर्ष की आयु में अधिक होता है। | एक ही स्थान पर लगातार काफी समय तक बैठे रहने से यह रोग हो जाता है। जो कुर्सी पर बैठकर घण्टों तक काम करते हैं, उनको यह रोग अधिक होता है।

  • गृध्रसी नाड़ी (Sciatic Nerve) पर दबाव पड़ने से यह रोग हो जाता है। यह नाड़ी कूल्हे (hips) के नीचे होती है। कुर्सी आदि पर बैठने से नाडी पर अधिक दबाव पड़ता है।

यह रोग कुर्सी पर बैठने से ही नही होता है बल्कि प्रत्येक उस अवस्था में होता है जिससे गृध्रसी नाड़ी (Sciatic Nerve) पर दबाव (pressure) पड़ता है। | इस रोग से ग्रस्त रोगी को नितम्ब (hips) से लेकर टखनों तक टीस भरे दर्द का अनुभव होता है।

कभी-2 दर्द इतना तीव्र होता है जिससे रोगी उठने-बैठने, चलने-फिरने में भी बहुत ज्यादा कष्ट अनुभव करता है। दर्द की लहर से रोगी काँप उठता है। कुछ रोगी तो कई-2 दिनों एवं सप्ताहों तक बिस्तर पर चिल्लाते रहते हैं। मामूली हिलने पर भी बहुत पीड़ा होती है।

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साइटिका के कारण(causes of sciatica in hindi)

अत्यधिक साईकिल या स्कूटर चलाने से भी इसका प्रभाव नाड़ी (sciatic nerve) पर पड़ता है जिससे दर्द प्रारम्भ हो सकता है। इसके अतिरिक्त यह रोग उनको अधिक होता है जिनके कूल्हे की हड्डी (hip bone) में कोई विकार हो।

  • कूल्हे से टखने तक जाने वाली इस गृध्रसी नाड़ी पर चोट लग जाना और शल्यक्रिया (surgery) से उत्पन्न विकृति (deformity) आदि के कारण भी यह रोग हो जाता है।

सायटिका की तीव्र पीड़ा तथा अधिक ठण्ड लगने के कारण भी यह रोग हो सकता है। गठिया (rheumatoid arthritis) भी इसका कारण हो सकता है। जिस मनुष्य के शरीर में पहले से उपदंश-सुजाक (syphilis gonorrhea) आदि रोगों का विष (toxins) होता है, उसको 40 वर्ष के बाद गृध्रसी रोग (साइटिका) होने की अधिक संभावना होती है।

  • इसके अतिरिक्त कशेरुका शोथ (Vertebral inflammation), देर तक पैदल चलना, स्थानीय अस्थिक्षय, अस्थि अर्बुद (bone tumor), पौरुष ग्रन्थि का संक्रमण, डिम्ब प्रणाली या डिम्बग्रंथि (ovarian infection) का संक्रमण, मधुमेह आदि के कारण भी साइटिका हो सकता है। ।

महिलाओं में अन्य कारणों के अतिरिक्त शल्य प्रसव (surgical delivery) के बाद इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है।

अचानक भारी वजन उठाना, झटके के साथ उठना आदि से भी साइटिका रोग हो जाता है। साइटिका प्रमुख रूप से कशेरूक कनाल (vertebral canal) से सम्बन्धित रोग है।

इनके अलावा साइटिका के प्रमुख कारण नीचे लिखे है जैसे कि…

1. हर्नियेटेड डिस्क (Herniated Disc)

इसे आमतौर पर slip disc भी कहा जाता है। हमारी स्पाइनल काॅलम (रीढ़ की हड्डी) में मोजूद हड्डियों के मध्य मे एक मुलायम (soft) चीज़ पाई जाती है जिसे डिस्क( disc) के कहा जाता है। ये हमारे शरीर के लिए कई प्रकार से महत्त्वपूर्ण मानी जाती हैं। जैसे कि कोई सामान उठाते समय, चलते वक्त ये हड्डियों को आपस में टकराने से रोकने का प्रमुख कार्य करती हैं। साथ ही साथ हड्डियों को किसी तरह के दबाव (pressure) या झटके से सुरक्षा प्रदान करती हैं।
हमारी रीढ़ की हड्डी में मोजूद डिस्क में दो भाग होते है जिसमें अंदरूनी हिस्सा नरम (soft) तथा बाहरी हिस्सा (outer ring) सख्त होता है। कुछ कारणों की वज़ह से अंदरूनी हिस्सा बाहरी हिस्से से बाहर निकल जाता है जिसे slip disc कहा जाता है।  साइटिका के कारणों में एक सबसे प्रमुख कारण slip disc या हर्नियेटेड डिस्क को भी माना जाता है।


2. स्पोन्डिलोलिस्थेसिस (spondylolisthesis)

यह रीढ़ की हड्डी (spinal cord) से related ऐसी स्थिति है जिससे मुख्य रूप से कमर दर्द की शिकायत रहती है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब कोई भी एक कशेरूका (vertebrae) जो कि पीठ (backbone) की प्रमुख हड्डी है अपने स्थान से खिसक कर उसके नीचे वाली कशेरूका के उपर चली जाती है। इसके कारण से साइटिका रोग होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।


3.स्पाइनल स्टेनोसिस (spinal stenosis)

जब स्पाइनल (spinal canal) केनाल संकुरी (narrow) होने लगती है ऐसी अवस्था को स्पाइनल स्टेनोसिस कहते है। इस तरह की स्थिति में रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ने लगता है। spinal स्टेनोसिस साइटिका का एक प्रमुख कारण होने के साथ-साथ रीढ़ की हड्डी का एक गंभीर रोग भी माना जाता है। आमतौर पर इस तरह की स्थिति बढ़ती उम्र वाले लोगों को ज्यादा होती हैं।

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4. डीजनरेटिव डिस्क डिजी़ज़ (degenerative disc disease)

यह सामान्य तोर पर बढती उम्र के साथ होने वाली एक प्राकृतिक स्थिति (natural condition) है। इसमें प्रमुख रूप से spinal column की कशेरूका (vertebrae) में पाए जाने वाली एक या उससे ज्यादा डिस्क विकृत हो जाती हैं।

इस स्थिति की वज़ह से अधिक दर्द होने लगता है। इस स्थिति को पीठ के निचले हिस्से (lower back) में पीड़ा होने के main कारणों में से एक माना जाता है। अगर degenerative disc disease  की वज़ह से पीठ के निचले हिस्से की नसों में दबाव तथा जलन बढती है तो इस वज़ह से भी साइटिका का दर्द होने की संभावना बढ़ जाती है।


5. मांसपेशियों में ऐंठन (muscles spasm)

इस तरह की अवस्था में एक या एक से ज्यादा मांसपेशियों में अचानक जकड़न (stiffness) का अहसास होता है। ऐसी स्थिति मे होने वाला दर्द गंभीर तथा परेशानी वाला होता है। ये स्थिति भी साइटिका का कारण बन सकती है। sciatic nerve मांसपेशियों मे से होकर गुज़रती है तथा इस तरह की जकडन उसे press कर सकती है।


6. ट्रोमा (trauma)

कई बार वाहन की दुर्घटना, खेल-संबंधी गतिविधि या गिरने से लगने वाली चोट के कारण भी साइटिका का दर्द हो सकता है। इस तरह की अवस्था के कारण sciatic nerve को नुकसान हो सकता है

या फिर इसी के कारण टूटी हुई हड्डी उस जगह पर दबाव डाल सकती है।
इसलिए इन बातों का सही रूप से ख्याल रखना चाहिए। इसके साथ साथ अपनी सेहत पर भी नज़र रखें।

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7. स्पाइनल ट्यूमर (spinal tumor)

स्पाइनल ट्यूमर ऐसी अवस्था को कहते हैं कि जब स्पाइनल कोर्ड या spinal column के नजदीक या अंदर के टिशू की असामान्य बढ़ोतरी होने लगती है। ये कैंसर जैसी अवस्था के साथ या उसकी अनुपस्थिति में भी हो सकता हैं। दोनों ही अवस्थाएं साइटिका का कारण बन सकती हैं खासतौर से जब ये साइटिक nerve या फिर पीठ (back) के हेठले हिस्से में हों तब risk बढ़ सकता है।


साइटिका की पहचान

यदि साइटिका नर्वस के ऊपर दबाव डालने से पीड़ा हो तो उसे गृध्रसी या साइटिका ही समझें। यह बात ध्यान में रखनी चाहिये कि पीड़ा तीव्र या धीमी भी हो सकती है। इस रोग में एक या दोनों टाँगों में पीड़ा एक साथ हो सकती है।

  • रोग पुराना होने पर पीड़ित पैर की मांसपेशियाँ सूखने लगती हैं जिससे पीड़ित पैर सूखने लगता है। रोग की प्रारंभिक अवस्था में जब दर्द प्रारम्भ होता है तो गृध्रसी नाड़ी (sciatic nerve) में सुन्नता अनुभव होती है। कुछ रोगी खाँसने-छीकने के समय एवं कुछ तो आराम की स्थिति में भी पीड़ा अनुभव करते हैं।

साइटिका का निदान (diagnosis of sciatica in hindi)

वैसे तो कुशल चिकित्सक रोगी के लक्षण को देखकर ही इस रोग की पहचान कर लेते हैं परंतु फिर भी पूरी तरह से रोग को सुनिश्चित करने के लिए नीचे लिखी गई कुछ जांच डॉक्टर के द्वारा करवाई जा सकती है जैसे कि…

1. एक्स रे (x-rays)- इस विधि के द्वारा शरीर के अंदर की इमेजेस ली जाती है यह तकनीक बोन स्पर्स (bone spur) की पहचान करने के लिए बढ़िया विकल्प है

2. सी टी स्कैन (c t scan)- इस तकनीक के द्वारा स्पाइनल कॉर्ड तथा नसों (nerves) की अवस्था को ओर भी बेहतर तरीके से समझा जा सकता हैसाइटिका बीमारी के लक्षण

3. एम आर आई (m r i)- यह तकनीक सीटी स्कैन से भी ज्यादा एडवांस है इस विधि में रेडियो वेव्स तथा चुंबकीय पद्धति का प्रयोग कर शरीर के अंदर की इमेजेस को लिया जाता है 

  • इस विधि के द्वारा रीड की हड्डी तथा नसों की परिस्थिति का ओर भी बेहतर ढंग से अंदाजा लगाया जा सकता है

4. इलेक्ट्रोमायोग्राफी (electromyography)- हर्नियाटेड डिस्क (herniated disc) के निदान के लिए यह एक बढ़िया जांच है

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साइटिका को बढ़ाने वाली अवस्थाएं (sciatica in hindi)

शरीर की कुछ ऐसी परिस्थितियां है जिनकी वजह से साइटिका रोग होने का खतरा बढ़ जाता है इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं जैसे कि…sciatica in hindi

1. शुगर रोग (diabetes)- शुगर रोग के कारण नर्व डैमेज (diabetic neuropathy) होने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है

2. धूम्रपान (smoking)- बहुत ज्यादा सिगरेट पीने के कारण स्पाइनल डिस्क के बाहरी सतह को नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है

3. उम्र (aging)- वैसे तो यह रोग किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है फिर भी बढ़ती उम्र के साथ साथ नसों में क्षति (nerve damage) होने का खतरा बढ़ने लगता है

4. मोटापा (obesity)- ऐसा देखा गया है कि शरीर का वजन ज्यादा होने से हमारी पीठ की मांसपेशियों में ऐठन तथा जकड़न बढ़ जाती है ऐसा पीठ की मांसपेशियों को ज्यादा कार्य करने की वजह से होता है ऐसी स्थिति में पीठ दर्द, पीठ में तनाव तथा नसों में दिक्कत आने की संभावना सामान्य से बढ़ जाती है

5. अन्य कारण (others)- ऐसे व्यक्ति जो किसी एक निश्चित स्थान पर ज्यादा देर तक बैठे रहते हैं ज्यादा वजन उठाते हैं ऐसे लोगों को भी सावधान रहने की जरूरत है ऐसे लोगों को आम लोगों की तुलना में साइटिका होने का खतरा काफी बढ़ जाता है

6. गर्भावस्था में साइटिका-

गर्भावस्था के दौरान कई स्त्रियों में साइटिका होना आम बात है यह स्थिति लिगामेंट्स के ढीले होने के कारण हो सकती है ऐसा इसलिए है क्योंकि ऐसी अवस्था में रीड की हड्डी थोड़ी अस्थिर हो जाती है तथा नसों में असामान्य प्रकार की अनुभूति महसूस होने लगती है

गर्भ में पल रहे बच्चे के वजन तथा जगह के कारण भी नसों पर दबाव बढ़ सकता है हालांकि कुछ ऐसे विकल्प मौजूद हैं जिनकी बुनियाद पर इस अवस्था के दौरान होने वाले साइटिका के दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है तथा कुछ मामलों में बच्चे के पैदा होने के बाद यह दर्द अपने आप ही चला जाता है

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साइटिका का अचूक इलाज

सहायक चिकित्सा-

  • रोगी बिस्तर पर आराम करे।
  • शान्तचित्त से रोग का निदान करें।
  • मूल कारण का पता लगायें।
  • यदि उपदंश या सुज़ाक (syphilis, gonorrhea) रोग का विष (toxins) शरीर में हो तो उसकी चिकित्सा करें।
  • पीड़ित भाग की सिंकाई करें।
  • पीड़ित भाग पर फलालेन या किसी नर्म एवं गर्म कपड़े को लपेट कर बाँध दें।
  • यदि कब्ज़ हो तो उसे दूर करें। आगे भी कब्ज नहीं हो इसलिये कब्जनाशक आहार दे, जिसको कब्ज लगातार रहता हो उसे नियमित रूप से ईसबगोल का छिलका सेवन करायें। विशेष परिस्थिति में एनीमा दें।
  • एक जाँवा (एककन्द) वाला लहसुन पीसकर सरसों के तेल में जलाकर पीडित पर मालिश करें।
  • मालिश के लिये जैतून का तेल भी लाभदायक है।

शरीर का शोधन (वमन और विरेचन-कै, दस्त इतियादी आयुर्वेदिक विधि से) करने से रोगी को बहुत फायदा होता है

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साइटिका का देसी इलाज

कैस्टर आयल 5 से 25 मि.ली. आयु अनुसार दूध में मिलाकर प्रतिदिन रात को देने से कब्ज़ नहीं होगी।

  • साइटिका के लिये ड्राई-ए-थर्मी तथा हीट पैड उपयोगी है। “इन्फ्रारेड लैम्प’ से सिंकाई करनी भी लाभप्रद है।साइटिका बीमारी के लक्षणगन्धक का चूर्ण पीड़ित स्थान पर छिड़ककर फलालेन का कपड़ा बाँध दें।
  • गर्म पानी की बोतल से सिंकाई करें।  
  • एक्स-रे, मलाशय परीक्षण एवं मूत्र-रक्त का शर्करा परीक्षण करवायें।
  • जब तक रोग से पूर्णत मुक्ति नहीं मिल जाये तब तक किसी प्रकार का भारी वजन उठाने से मना कर दें।

हल्के व्यायाम की सलाह दें जिससे पीड़ित अंग की माँसपेशियाँ अपनी क्षमता (Strength) को ना खोएं।


साइटिका के लिए तेल

महानारायण तेल, महाविषगर्भ तेल, महामाष तेल, कुदरती तेल, प्रसारिणी तेल (आयुर्वेदिक तेल) –सब समभाग मिलाकर पीडित स्थान की मालिश प्रतिदिन 2-3 बार करने से बहुत फायदा होता है।मालिश करने से पहले तेल को थोडा गर्म करें।प्रदाहनाशक (anti-inflammatory) एवं पीड़ाशामक (pain-killers) औषधियों का प्रयोग करें।

  • औषधोपचार से सफलता न मिले तो शल्य चिकित्सका (surgery) का सहारा लिया जा सकता है।

विशेष ध्यान दे- यदि चलते समय कमर से लेकर नीचे पैरों तक त्वचा मे धागे या डोरी जैसी पीड़ा का अनुभव हो तो ये साइटिका हो सकता है


साइटिका में उपयोगी विटामिन्सयुक्त औषधियाँ (साइटिका की अंग्रेजी दवा)

1. न्यूरोबियॉन फोर्ट Neurobion Forte (by merck)- इसका इंजेक्शन और टिकिया दोनों उपलब्ध है। 1-1 इंजेक्शन प्रतिदिन या तीसरे दिन गहरे माँस में लगाने से रोगी को बहुत फायदा होता है। इसकी 1-1 टिकियाँ प्रतिदिन 2-3 बार आवश्यकतानुसार दें सकते है।

2. न्यूरोट्रैट Neurotrat LM टेबलेट (zydus cadila) 1-1 गोली प्रतिदिन 3 बार देंने से साइटिका मे बहुत फायदा होता है।

3. मल्टी एड Multi-Aid (बेस्टोकेम) 1-1 कैप्सूल प्रतिदिन 2 बार देंना बहुत फायदेमंद है।

4. मल्टीबे Multibay Cap (बायर)- 1-1 कैप्सूल प्रतिदिन दो बार दें। आराम आ जाने के बाद 1-1 कैप्सूल प्रतिदिन दिया जाना चाहिए।

5. मल्टीन्यूरॉन फोर्ट Multineuron Forte -(बेस्टेकेम)-यह टिकियों के रूप में उपलब्ध है। वयस्कों को 1-1 टिकिया प्रतिदिन 2-3 बार दें।

6. ऑप्टीन्यूरॉन Optineuron forte (लुपिन)-  इसकी एक गोली सुबह शाम देना साइटिका मे बहुत लाभप्रद है।

7. मेक्राबेरिन फोर्ट Macraberin Forte (ऐलनबरीज)- इसकी टिकियाँ व् इंजेक्शन दोनों उपलब्ध है। 1-2 इंजेक्शन प्रतिदिन या तीसरे दिन माँस में (I.M.) या 1-1 टिकिया प्रतिदिन 1-2 बार देंना साइटिका मे लाभकारी है।

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साइटिका का देसी इलाज (आयुर्वेदिक योग)

प्रताप लंकेश्वर रस 125 से 250 मि.ग्रा. सुबह-शाम शहद के साथ चाटकर उपर से दशमूल क्वाथ पिलायें। इस योग के साथ-साथ दशमूल तेल की मालिश भी करें।


वेदनान्तक रस 1 गोली सुबह-शाम गर्म जल, दूध या अदरक के रस के साथ देने से एकाँगिक, सर्वांगिक, नसों का खिंचाव का दर्द आदि में बहुत फायदा होता है।


महावात विध्वंसन रस1-2 गोली प्रतिदिन 2-3 बार अदरक के रस और शहद के साथ चाटने से लाभ होता है।


वायविडंग तथा लहसुन का क्षीरपाक सुबह-शाम लेने से लाभ होता है। इसके साथ ही लहसुन से सिद्ध तेल की मालिश करना लाभप्रद है।


योगेन्द्र रस 1-1 गोली सुबह-शाम एरण्ड मूल और शहद के साथ मिलाकर देंना फायदेमंद है।

साइटिका बीमारी के लक्षणत्रयोदशाँग गु. 2-4 गोली गर्म पानी या दूध के साथ सुबह-शाम दें। पक्षावात एवं वात रोगों में बहुत लाभप्रद है।

Dardgo आयुर्वेदिक कटिका ट्रीटमेंट टैबलेट-

साइटिका के लिए बहुर ही बढ़िया आयुर्वेदिक ब्रांडेड दवा है आप इसे ऑनलाइन खरीद कर इसका इस्तेमाल कर पूरा लाभ प्राप्त कर सकते है इसका link नीचे चित्र मे दिया गया हैसाइटिका बीमारी के लक्षण


साइटिका की आयुर्वेदिक दवा

निर्गुण्डी के पत्तों का काढ़ा (क्वाथ) कटिस्नायुशूल (Sciatica) में लाभप्रद है।साइटिका की आयुर्वेदिक दवा

अरण्डी (एरण्ड) के बीजों की गिरी दूध में पीसकर लेने से साइटिका रोग में लाभ होता है।

  • रास्ना और गुग्गुल 4-4 ग्राम समभाग पीसकर गोलियाँ बना लें। 1-1 गोली सुबह-शाम प्रतिदिन दो बार लेंना फायदेमंद है।

कटेली और अरण्ड का काढ़ा बनाकर इसमें तेल मिलाकर प्रयोग करने से कफजनित (कफदोष से उत्पन्न) साइटिका ठीक हो जाती है।

  • अदरक के रस में घी मिलाकर गर्म करके प्रयोग करने से पीडित रोगी को लाभ होता है।
  • सरसों के तेल में लहसुन पीसकर धीमी आँच पर पकाएं। इस तेल की मालिश पीडित अंग पे करने से लाभ होता है।

सोंठ एवं पीपल से सिद्ध तेल की मालिश करने से बहुत लाभ होता है।

  • महाविषगर्भ तेल और तारपीन का तेल बराबर-2 मिलाकर पीड़ित भाग पर मालिश करना लाभप्रद है।

पारिजात (हरसिंगार) के पत्तों का मन्द आँच पर बनाया हुआ क्वाथ (काढा) 15 से 30 मि.ली. प्रतिदिन दो बार लेने से साइटिका में लाभ होता है। साइटिका के लिए ये प्रमाणित योग है।

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साइटिका का होम्योपैथिक इलाज

एमान म्यूर (Ammon Mur) 3x,3 – बैठने से दर्द का बढना, चलने-फिरने से आराम मिलना, सोते समय दर्द होना इसके मुख्य लक्षण हैं।

  • एकोनाइट (Aconite Nap)2x,3x,6 – तेज हवा लगने से रोग बढ़े तब दे।
  • कोलोसिन्थ (Colocynth) 3,30,200 – यदि रोग अचानक हो जाये तो इसे दें। सर्दी लगने एवं अन्य किसी कारण से उत्पन्न रोग में भी यह सफल औषधि है।

रसटॉक्स (Rhus-Tox) 6, 200, IM – बरसात के समय रोग की उत्पत्ति हो या रोग की वृद्धि हो तो इसे देंना लाभप्रद है।

  • नैफेलियम (Gnaphalium)3,6,30 – स्नायुओं में तेज़ दर्द और सुन्न-सा हो जाना। बायीं और दायीं ओर की साइटिका में लाभदायक है।
  • लाइकोपोडियम (Lycopodium) 12,30,200 – दाहिनी ओर की साइटिका में वृद्धि शाम 4 से 8 बजे, पीड़ित अंग को दबाने व् सोने मे भी कष्ट हो तो इसका इस्तेमाल करें।

लैकेसिस (Lachesis) 3,200 – बायीं ओर की साइटिका , रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद रोग की उत्पत्ति तथा नींद खुलने पर कष्ट में वृद्धि हो तब देना ज्यादा फायदेमंद है।

  • कार्बोनियम सल्फ (Carboneum Sulph.) 30,200 – रोग नया हो या पुराना, रोगी रोग को असाध्य रोग समझे। किसी औषधि से लाभ नहीं हो रहा हो तो इसे देंना चाहिए।
  • सल्फर (Sulphur) 200 – रोग पुराना हो जाने पर बीच में 1-2 सप्ताह बाद 1-2 मात्रा दें। मूल निर्वाचित औषधि के बीच-2 में इसका सेवन करवाना फायदेमंद है।

विस्कम एल्बम (Viscum Alb.) Q,30- साइटिका की यह उत्तम औषधि है। दोनों ओर की साइटिका की सफल औषधि है। रोग की उग्रता अधिक हो तो इसे देंना ठीक है।


साइटिका की एलोपैथिक दवा

साइटिका के इलाज के लिए विकल्प के रूप में अनेकों उपाय हैं परंतु पीड़ित व्यक्ति के दर्द तथा तकलीफ को कम करने के लिए नीचे कुछ अंग्रेजी दवाइयों के उदाहरण दिए गए हैं जिनका प्रयोग चिकित्सक की सलाह पर करने से साइटिका के दर्द से तुरंत ही आराम पाया जा सकता है जैसे कि… साइटिका की एलोपैथिक दवा

Aceclofenac युक्त दवाएं-

  • Hinac टैबलेट 
  • Aclofen 
  • Dolokind 
  • Movexx 

यह टेबलेट 100 मिलीग्राम की मात्रा में पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह-शाम देने से साइटिका के दर्द में बहुत लाभ मिलता है

Diclofenac युक्त दवाएं-

  • Dicloran टैबलेट
  • Diclotal 
  • Fensaid 
  • Nufenac 

यह दवा 50 से 100 मिलीग्राम की गोलियों तथा 75 मिलीग्राम के इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध है इनका उपयोग चिकित्सक की देखरेख में करने से साइटिका का दर्द ठीक करने में बहुत मदद मिलती है

Ibuprofen युक्त दर्द निवारक दवा-

  • Cipgesic टैबलेट
  • Ibugesic 
  • Ibucon 
  • Ibugin 
  • Corflam (ibuprofen with paracetamol)
  • Dolomed 
  • Duoflam 

यह दवा 200, 400 तथा 600 मिलीग्राम की मात्रा में गोलियों के रूप में उपलब्ध है इनका इस्तेमाल भी साइटिका दर्द को कम करने के लिए किया जा सकता है 

Nimesulide युक्त दवाइयां-

  • Nimodol टैबलेट 
  • Nam 
  • Nemon 

यह दवा 50 से 100 मिलीग्राम की मात्रा में उपलब्ध है साइटिका दर्द को कम करने में बहुत लाभप्रद है

Mefenamic acid युक्त दवाइयां-

  • Mefac टैबलेट 
  • Meftal 
  • Dysmeno 500
  • Ponstan 

यह दवा ढाई सौ से 500 मिलीग्राम की मात्रा में उपलब्ध है साइटिका के दर्द को कम करने में बहुत असरदार हैं

विशेष ध्यान दें

ऊपर दी गई अंग्रेजी दवाओं की जानकारी केवल आपके ज्ञान मात्र के लिए है किसी भी स्थिति में इन दवाइयों का प्रयोग करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी है

इसके अलावा गैस, एसिडिटी, पेट में छाले, अभ्यंतर रक्तस्त्राव, गुर्दे के रोग, यकृत रोग इत्यादि से पीड़ित व्यक्ति इन दर्द निवारक दवाइयों का प्रयोग बिल्कुल भी ना करें


साइटिका का इलाज (surgery)

जब इलाज के सारे विकल्प असफल हो जाते हैं तो ऐसी स्थिति में शल्य चिकित्सा के द्वारा साइटिका का इलाज किया जाता है सर्जरी के माध्यम से डॉक्टर Bone Spur या फिर हर्नियाटेड डिस्क को निकाल देते हैंसाइटिका का इलाज

जिसके कारण नसों पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाता है जिसके चलते पीड़ित व्यक्ति को साइटिका के दर्द से काफी आराम महसूस होता है इस प्रकार की सर्जरी पूरा कुशल शल्य चिकित्सक ही कर सकता है

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साइटिका का इंजेक्शन

लंबे समय तक दर्द निवारक दवाइयों का सेवन करने तथा फिजियोथैरेपी का उपयोग करने के बावजूद भी जब पीड़ित व्यक्ति को दर्द से राहत नहीं मिलती तो ऐसी स्थिति में इंजेक्शन की मदद से साइटिका के लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है 

  • डॉक्टरों के अनुसार एपिडयुरल इंजेक्शन दवाइयों तथा सर्जरी के बीच का बेस्ट उपाय है इस प्रक्रिया में रीड की हड्डी के सबसे नीचे के जोड़ों के पास की नसों में इंजेक्शन लगाया जाता है जिस कारण जोड़ के क्षतिग्रस्त होने की वजह से नसों में उत्पन्न हुई सूजन को नियंत्रित किया जाता है
  • ऐसा करने से नसों में रक्त संचार बढ़ जाता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस इलाज के द्वारा स्पाइनल कैनाल का व्यास बढ़ जाता है इस विधि के द्वारा पीड़ित मरीज को असहनीय दर्द से आराम मिल जाता है

एक्सपर्ट्स के अनुसार मात्र 20 से 25 दिनों में दवा अपना असर दिखाना पूरी तरह से शुरू कर देती है इस इंजेक्शन का प्रयोग 1 महीने के अंतराल पर कुल 3 बार किया जाता है

  • सर्जरी से तुलना करने पर डॉक्टर बताते हैं कि साइटिका पीड़ित रोगी को सर्जरी करवाने के लिए भारी भरकम खर्च उठाना पड़ता है जबकि इस इंजेक्शन की कीमत मात्र 700 rupey के लगभग होती है जोकि सरकारी अस्पताल में ना के बराबर होती है और ना ही मरीज को अस्पताल में दाखिल करने की जरूरत पड़ती है इंजेक्शन लगने के मात्र कुछ समय बाद पीड़ित अपने घर जा सकता है

अस्थि रोग विशेषज्ञों के अनुसार इंजेक्शन थेरेपी का इस्तेमाल करने से पहले m.r.i. तथा एक्स-रे की मदद से रीड की हड्डी की क्षति स्पाइनल कैनाल के संकरेपन तथा नसों में आई हुई सूजन का सही से पता लगाया जाता है


साइटिका के लिए योगासन

साइटिका रोग में नितंबों से लेकर पैरों तक तीव्र दर्द रोगी को नसों में आई हुई सूजन तथा खिंचाव के कारण होता है 30 से 40 वर्ष की आयु में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है कुछेक योगासन ऐसे हैं जिनकी मदद से साइटिका की समस्या को दूर किया जा सकता है इनका संक्षिप्त वर्णन नीचे किया गया है जैसे कि…

1. भुजंगासन

  • कोबरा पोज को ही भुजंगासन कहते हैं इस आसन में शरीर के ऊपरी हिस्से को नाग की तरह ऊपर उठाया जाता है साइटिका के साथ-साथ यह आसन थायराइड तथा पेट की चर्बी को कम करने में भी लाभदायक है जिन व्यक्तियों को अल्सर या हर्निया की शिकायत है वह इस आसन को ना करें

विधि:

  • सर्वप्रथम पेट के बल पीड़ित व्यक्ति लेट जाए
  • दोनों पैरों के बीच कम से कम दूरी रखें तथा लंबी सांस लेते हुए शरीर के ऊपर वाले हिस्से को ऊपर उठाएं
  • बिना कमर पर ज्यादा दबाव डालें अपनी क्षमता के अनुसार आसन की मुद्रा को सही बनाए रखें

शुरू शुरू में तीन से चार बार इसे करें अभ्यास होने पर इसकी संख्या बढ़ाई जा सकती है


2. अपान-आसन 
  • साइटिका के कारण होने वाले दर्द तथा सुनपन के लिए बहुत ही असरदार योगाभ्यास है साइटिका के अतिरिक्त पेट में जमा चर्बी तथा एसिडिटी को नियंत्रित करने में भी बहुत फायदा करता है अगर पीड़ित व्यक्ति को गर्दन या घुटनों में दर्द है तो इस आसन को ना करें

विधि:

  • सर्वप्रथम पीठ के बल सीधा लेट जाएं
  • अब अपने दोनों पैरों को उठाते हुए घुटनों को छाती के पास लाएं
  • अब अपने सिर को उठाएं साथ ही साथ ठोडी को घुटनों से स्पर्श करें इसके बाद घुटनों से मोड़कर अपनी बाहों के घेरों में इसे ले
  • कोशिश करें जब तक आप इस मुद्रा में रह सके तब तक रहे फिर सांस छोड़ते हुए पैरों को सीधा करें
  • शुरू शुरू में अपनी क्षमता के अनुसार थोड़ा समय इसका अभ्यास करें

इस आसन को करने से साइटिका की वजह से होने वाला पीठ दर्द तथा बदन दर्द से बहुत आराम मिलता है यह पैरों की हड्डियों को भी मजबूत बनाता है सही व नियमित रूप से करने से उच्च रक्तचाप की समस्या भी दूर होती है


3. अधोमुख श्वान आसन 
विधि: 

  • इस विधी को करने के लिए पहले दोनों हाथो व् घुटनों के बल सीधा लेट जाएं।
  • अब शरीर के पिछले portion को थोडा ऊपर उठाइए साथ ही घुटनों तथा हाथों को भी सीधा कर करके रखें।
  • दोनों हाथों को सामान रखें तथा अपनी हथेलियों को पूरा फैला दें।

2 से 3 मिनट तक ऐसी ही स्थिति मे रहना चाहिए।


4. सुप्त पादांगुष्ठासन 

इस आसन का main मकसद पैरों को स्ट्रेच (stretch) करने पर होता है जो साइटिका की समस्या में काफी आराम प्रदान करता है।

विधि: 

  • सबसे पहले दोनों पैरो को जमीन पर फैला कर सीधे लेट जाये। 
  • अब धीरे से एक पैर को उपर उठाइये तथा अब आप एक इतना लम्बा कपड़ा ले जिसको पंजे के बीच मे डाल कर हाथो में अच्छे से पकड़ कर रख सकें। 

अब पैरों को धीरे-धीरे से stretch करना चाहिए। घुटनो को बिना मोड़े पैर को सिर की तरफ लेजाने की try करे। कुछ समय ऐसी ही स्थिति मे रहना चाहिए


5. शलभासन योग 
इसको नियमित रूप से करने से साइटिका से होने वाले पीठ तथा कमर दर्द में बहुत आराम मिलता है। ये विधि वजन घटाने, कब्ज की समस्या से आराम दिलाने तथा दमा रोग दूर करने में भी बहुत फायदेमंद है।

कंधो व् हाथो को मजबूत बनाने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है। इस योगासन से साइटिका रोग में काफी हद तक आराम मिलता है। इसके साथ साथ पीठ दर्द को भी आराम देता है तथा मांसपेशियों को रिलैक्स करता है।

विधि:

  •  इस विधि मे पहले उल्टे लेट जाएं फिर श्वास को धीरे धीरे अंदर ले जाते हुए अपने पैरों को धीरे धीरे ऊपर उठाइए।
  •  अब इसके बाद हाथों की मुठ्ठी बना के जांघों के नीचे रख लेंनी चाहिए।
  •  अब पैरो को बिना मोड़े सीधा रखते हुए धीरे धीरे गहरी सांस लें।
  •  अब इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए पैरों को नीचे रख अभ्यास करें।

FAQ 

Q साइटिका की पहचान क्या है?

A विशेषज्ञों के अनुसार साइटिका की प्रमुख पहचान कमर के नीचे वाले हिस्से से पैरों के तलवों तक जाने वाला तीव्र दर्द जिसके कारण पैर के अंगूठे तथा उंगलियां सुन पड़ जाते हैं यह स्थिति लगातार बनी रहे तो आंतरिक नसों को ओर भी नुकसान पहुंचा सकती है

कई मरीजों को झनझनाहट जैसी पीड़ा कमर से पैरों तक होती है ज्यादातर मामलों में साइटिका एक तरफ ही होता है


Q साइटिका को हमेशा के लिए ठीक कैसे करें?

A विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ जीवन शैली को अपनाना, वजन घटाना, धूम्रपान का त्याग करना, हल्का व्यायाम इत्यादि से साइटिका के लक्षणों को कम किया जा सकता है गंभीर स्थिति में कॉर्टिकोस्टेरॉइड का इंजेक्शन भी कारगर है परंतु इसके गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं


Q साइटिका कौन सा रोग है?

A साइटिका प्रमुख रूप से तंत्रिका से जुड़ा हुआ रोग है जिसमें सायटिक नर्व पर दबाव पड़ने के कारण तीव्र दर्द नितंब से लेकर टख्नो तक जाता है कई बार घुटने तथा टखने में पीड़ा बहुत अत्यधिक होती है तथा पैर का निचला हिस्सा सुन पड़ जाता है


Q साइटिका दर्द कब होता है?

A जब किसी भी कारण जैसे हर्नियाटेड डिस्क, स्पाइनल ट्यूमर, कशेरुका अस्थियों के आपस में टकराने या किसी भी चोट इत्यादि के कारण सायटिक नर्व पर दबाव पड़ता है तो ऐसी स्थिति में साइटिका का दर्द प्रारंभ हो जाता है इसे कटीस्नायुशूल भी कहते हैं


Q साइटिका कितने समय तक रह सकती है?

A साइटिका का दर्द 4 से 6 महीनों में सामान्यतः ठीक हो जाता है बाकी कारण अगर गंभीर हो तो यह स्थिति लंबे समय तक परेशान कर सकती है

“साइटिका बीमारी के लक्षण, कारण व् उपचार- Sciatica in Hindi” पढ़ते रहें…


Q क्या साइटिका ठीक हो सकती है?

A साइटिका की समस्या 90 से 95% मामलों में बिना सर्जिकल उपचार के चिकित्सा के अन्य माध्यमों जैसे आयुर्वेद, होम्योपैथी, एक्यूपंक्चर तथा फिजियोथैरेपी का सही पालन करने से बिल्कुल ठीक हो जाती है


Q साइटिका में क्या नहीं खाना चाहिए?

A आयुर्वेद के अनुसार साइटिका रोग में शुद्ध प्रकृतिक आहार का सेवन करना चाहिए ऐसे रोगियों को किसी भी प्रकार का मांसाहार जैसे मटन, चिकन, मछली इत्यादि पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए


Q साइटिका के दर्द के लिए कौन सी एक्सरसाइज करनी चाहिए?

A साइटिका के दर्द के प्रबंधन के लिए भुजंगासन, शलभासन, अपानआसन, 3 अधोमुखस्वान आसन आदि का सहारा लेकर लाभ प्राप्त किया जा सकता है


Q साइटिका की आयुर्वेदिक दवा कौन सी है?

A साइटिका के आयुर्वेदिक इलाज में प्रयोग की जाने वाली मुख्य दवा महावात-विधवनसन रस, निर्गुंडी तेल महानारायण तेल, महाविषगर्भ तेल, महामाष आदि तेल हैं इसके अतिरिक्त दशमूल क्वाथ तथा दशमूल तेल का इस्तेमाल भी साइटिका में किया जाता है


Q साइटिका का इंजेक्शन कितने रुपए का आता है?

A साइटिका इंजेक्शन की कीमत 700 रुपए के लगभग है सरकारी अस्पताल में इसकी कीमत बहुत ही कम होती है


Q पतंजलि में साइटिका की कौन सी दवा है?

A इसके लिए त्रयोदशांग गुग्गुल, चंद्रप्रभा वटी, अश्वशिला इत्यादि आयुर्वेदिक दवाएं उपलब्ध है


Q एक्यूपंक्चर विधि में साइटिका का इलाज कैसे किया जाता है?

A तंत्रिकाओं के दर्द को नियंत्रित करने के लिए कुछ खास किस्म के प्वाइंट्स पर बालों के समान पतली सुइयां चुभोकर साइटिका का इलाज किया जाता है


निष्कर्ष (Sciatica in Hindi)

अगर किसी भी व्यक्ति को तीव्र प्रकार का दर्द कमर के निचले हिस्से से शुरू होकर पैरों तक जाता है तो ऐसी स्थिति में साइटिका रोग हो सकता है इसके प्रबंधन के लिए सर्वप्रथम अपने चिकित्सक से सलाह मशवरा कर फिजियोथैरेपी को अपनाना चाहिए

दर्द को कम करने के लिए ऊपर लिखी अंग्रेजी दर्द निवारक दवाइयों का इस्तेमाल थोड़ी मात्रा में कर लेना चाहिए, अगर फिर भी आराम ना मिले तो ऐसी स्थिति में अन्य चिकित्सा विकल्प जैसे आयुर्वेद, होम्योपैथी या एक्यूपंक्चर का सहारा लिया जा सकता है

  • इससे भी आराम ना हो तो शल्य चिकित्सा की बजाए साइटिका में लगने वाले कॉर्टिकोस्टेरॉइड के इंजेक्शन की मदद लेने से पीड़ित व्यक्ति के दर्द तथा सूजन को बहुत आराम मिलता है

अगर साइटिका का कारण गंभीर है तो ऐसी स्थिति में इससे निजात पाने के लिए आपको बहुत ही कुशल आर्थोपेडिक डॉक्टर से मिलने की जरूरत पड़ सकती है

सबसे जरूरी बात का ध्यान यह रखे की पीड़ित व्यक्ति को ज्यादा वजन उठाना तथा हैवी व्यायाम (intense exercises) से बचना चाहिए ऐसी स्थिति में दर्द तथा सूजन बढ़ने की संभावना अधिक रहती है

ज्यादा जानकारी के लिए आप हमें हमारे ईमेल आई डी पर भी संपर्क कर सकते हैं


Disclaimer (साइटिका बीमारी के लक्षण-Sciatica in Hindi)

इस आर्टिकल में दी गई नींद की दवाइयों की जानकारी केवल ज्ञान मात्र के लिए है कृपया नीचे दी गई किसी भी अंग्रेजी दवाई को बिना डॉक्टर की सलाह बिल्कुल भी इस्तेमाल ना करें

  • क्योंकि इन दवाइयों के सेवन से कई प्रकार के शारीरिक तथा मानसिक दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं
  • बाकी यह दवाइयां सिर्फ डॉक्टर की पर्ची पर ही मिलती है इसलिए डॉक्टर की सलाह से ही इस्तेमाल की जानी चाहिए

इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद किसी भी दवा का इस्तेमाल अपनी मर्जी से करने से अगर कोई नुकसान होता है तो इसका जिम्मेदार वह व्यक्ति खुद होगा हमारी इसमें कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी

Information Compiled- by Dr Vishal Goyal

Bachelor in Ayurvedic Medicine and Surgery

Post Graduate in Alternative Medicine MD (AM)

Email ID- [email protected]

Owns Goyal Skin and General Hospital, Giddarbaha, Muktsar, Punjab

“साइटिका बीमारी के लक्षण, कारण व् उपचार- Sciatica in Hindi” पढने के लिए धन्यवाद…


सन्दर्भ (साइटिका बीमारी के लक्षण):

https://www.aans.org/en/Patients/Neurosurgical-Conditions-and-Treatments/HerniatedDisc-slip disc cause of sciatica study

https://www.mountsinai.org/locations/spine-hospital/conditions/spondylolisthesisspondylolisthesis and sciatica study

https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/17499-spinal-stenosisspinal-stenosis and sciatica study

https://www.southerncross.co.nz/group/medical-library/sciatica-symptoms-pain-relief-treatmentmuscle spasm cause sciatica

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5033086/- trauma cause sciatica study

https://www.spine-health.com/conditions/sciatica/spinal-tumors-and-sciatica-symptomsspinal-tumors cause sciatica

https://www.sciencedirect.com/science/article/abs/pii/S0303846718303160- case of sciatica revealing a giant syphilitic aneurysm study


 

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