यूरिक एसिड की रामबाण दवा-gout in hindi

यूरिक एसिड की रामबाण दवा-gout in hindi पूरा विवरण

यूरिक एसिड की रामबाण दवा-gout in hindi: यह जोड़ों का एक प्रसिद्ध रोग है जिसे gout भी कहते है जिसके शुरु मे बहुत ज्यादा दर्द तथा सूजन ज्यादातर केवल एक जोड़ (joint) में तथा बार-बार होता है।

यूरिक एसिड की रामबाण दवा
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यह आरम्भिक आक्रमण आमतोर पर बड़े अंगूठे के जोड़ Metatarsophalangeal Joint में होता है जो बाद में बहुत सारे अन्य जोड़ों में भी होने लगता है।

जबकि आरम्भिक वातरक्त (gout) रोग प्यूरीन (Purine) नामक पदार्थ के शरीर में अपचन कारण Metabolic Disturbance से होता है किन्तु जोड़ों (joints) के प्रभावित होने के कारण इस रोग का वर्णन भी जोड़ों के दर्द (joint pain) के अन्तर्गत किया जा रहा है।

यूरिक एसिड की रामबाण दवा-gout in hindi के प्रकार, कारण व् लक्षणों का पूरा वर्णन आगे किया जा रहा है…


गाउट के प्रकार (यूरिक एसिड की रामबाण दवा-gout in hindi)

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1 गाउट के प्रकार (यूरिक एसिड की रामबाण दवा-gout in hindi)

यूरिक एसिड यानि वातरक्त (GOUT) मुख्यतः दो प्रकार का होता है…

  • 1. तीव्र वातरक्त सन्धिशोथ (Acute Gouty Arthritis) 
  • 2. जीर्ण वातरक्त सन्धिशोथ (Chronic Gouty Arthritis)

जोड़ों में यूरिक एसिड (Uric Acid) के एकत्रित होने से विशेषतः पैरों (Feet& Legs) में पीड़ादायक सन्धिशोथ (joint swelling) होता है।

  • इस स्थिति के प्रमुख कारणों मे मैटाबोलिज्म विकार जिसके परिणामस्वरूप यूरिक एसिड निर्माण शरीर में अधिक होना अथवा गुर्दों (kidneys) द्वारा यूरिक एसिड का उत्सर्जन (excretion) कम होना है।

इसका निश्चित कारण वास्तव में अभी तक पूरी तरह से ज्ञात नहीं है। यह रोगीय दशा (patient condition) ऐसे व्यक्तियों में भी हो सकती है जो मधुमेह (diabetes) से पीड़ित हों, मोटापा, सिकिल सैल रक्ताल्पता (sickle cell anemia) तथा वृक्क रोग (kidney diseases) अथवा किसी अन्य रोगोपचार के लिये सेवन की जानी वाली औषधि जो यूरिक एसिड के उत्सर्जन (excretion) को प्रभावित करती हो तो ऐसी स्थिति मे तीव्र वातरक्त सन्धिशोथ (Acute Gouty Arthritis) हो सकता है 

वातरक्त (gout) की चार अवस्थायें (stages) हो सकती हैं-

  • (1) लक्षणरहित (Asymptomatic)
  • (2) तीव्र वातरक्त (Acute)
  • (3) मध्यवर्ती
  • (4) जीर्ण दशा (Chronic)

तीव्र वातरक्त (Acute Gouty Arthritis)

की अवस्था में एक या कुछ जोड़ों (joints) में रोग के लक्षण अचानक उत्पन्न हो जाते हैं। प्रभावित सन्धि (joint) में शोथ, उष्णता, लालिमा (redness) तथा छुने (Touch) से दर्द होता है।

जोडों में होने वाला दर्द रात्रि के समय बार-बार होता है। यह स्थिति रोगी की कई दिन तक बनी रह सकती है जो कभी-कभी कुछ समय अवकाश देकर फिर से हो सकती है। इस दशा के गुज़र जाने के पश्चात् रोग का दुबारा आक्रमण (attack) हो सकता है जो अधिक समय तक रह सकता है

  • इनमें से कुछ रोगी जीर्ण अवस्था (chronic stage) में पहुँच जाते हैं जबकि अन्य को फिर से रोग का आक्रमण (attack) नहीं होता है।

पुरुषों में यह अवस्था अधिक देखने को मिलती है। इसी प्रकार महिलाओं में मासिकधर्म (Menopause) बन्द होने तथा जो व्यक्ति गुर्दा रोगों (kidney diseases) से पीड़ित हो, मधुमेह, रक्ताल्पता (anemia) या मोटापे का शिकार हों, उनको यह रोग अधिक होता है। एक हजार व्यक्तियों में से पाँच व्यक्ति इस रोग का शिकार हो सकते हैं।


यूरिक एसिड के लक्षण (Acute Gouty Arthritis)

जोड़ों (joints) में अचानक तेज दर्द का होना। प्रभावित जोड़ कूल्हे (Hip joint), घुटने (Knee joint), टखने (Ankle joint), पैर, कंधे (Shoulder), कोहिनी (Elbow) तथा हाथ की कलाई (Wrist) के जोड़ हो सकते हैं इनमें भी अंगूठे (Big toe), घुटने अथवा टखने का जोड़ अधिक रोगग्रस्त होता है।

  • जोड़ों में सूजन के कारण ये फूल (swelling) जाते हैं, जोड़ों में कठोरता (Stiffness) हो जाती है। जोड के स्थान पर उष्णता एवं लालिमा (redness) स्पष्ट होती है।

रोगी को ज्वर (fever) हो सकता है। त्वचा में गाँठें (Lumps) हो सकती हैं। इस प्रकार रोगी का निरीक्षण करने से तीव्र वातरक्त (Acute Gout) की दशा का निदान किया जा सकता है। जिसकी पुष्टि तथा सहायता के लिये कुछ प्रयोगशाला परीक्षण (lab tests) भी करा सकते हैं।


यूरिक एसिड टेस्ट

जैसे- जोडो की झिल्ली से द्रव (Synovial Fluid) निकालकर परीक्षण कराया जाये तो उसमें यूरिक एसिड के कण (Uric Acid Crystals) दिखायी देते हैं।

  • रोगी के रक्त की जाँच से यूरिक एसिड की मात्रा की वृद्धि का पता चल जाता है।
  • यदि एक्स-रे देखा जाये तो उसमें शोथ (swelling) दिखायी देती है किन्तु यह कभी-कभी सामान्य भी दिखायी देती है।

इसके अतिरिक्त रोगी के मूत्र में यूरिक एसिड की उपस्थिति, जोड़ों की झिल्ली की जाँच (Biopsy) तथा रक्त भिन्नता (Blood Differential) से भी तीव्र वातरक्त (Acute Gouty Arthritis) रोग की पुष्टि होती है।

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Acute Gouty Arthritis रोग की रोकथाम (Prevention)– यद्यपि रोग शुरू होने पर रोकथाम सम्भव नहीं है बल्कि जोड़ों की चोट (injury), मद्यपान (alcoholism), भोजन में प्रोटीन की अधिकता रोग को उत्पन्न करने के प्रमुख कारण हैं जिनसे बचाव किया जा सकता है।

लक्षणानुसार औषधियों के सेवन से लाभ की सम्भावना कुछ ज्यादा रहती है। यूनानी चिकित्सा में इस रोग का सफल उपचार किया जा सकता है। यदि चिकित्सा सिद्धान्तों को सामने रखकर उचित उपचार की व्यवस्था हो सके।


जीर्ण वातरक्त सन्धिशोथ (Chronic Gouty Arthritis)

की दशा जैसा कि रोग के नाम से ही पता चलता है। पुराने वातरक्त (gout) में जिस जोड़ (joint) के अन्दर यूरिक एसिड ज्यादा जमा होता हैं। ऐसे जोड़ों में विशेषकर पैरों (Feet) तथा पिण्डलियों व जंघाओं (Legs) में दर्द होता है तथा शोथ (swelling) बढ़ता-घटता रहता है।

  • यह स्थिति शरीर की मैटाबोलिक प्रक्रिया (Metabolism) है जिसके कारण यूरिक एसिड अधिक मात्रा में उत्पन्न होता है अथवा गुर्दों (kidneys) द्वारा शरीर से बाहर नहीं निकलता तथा रक्त संचार द्वारा जोड़ों में एकत्रित होने लगता है। वास्तव मे इस रोगीय दशा (patient condition) के क्या कारण है इसका अभी तक भी पूरी तरह से पता नहीं चल पाया है।

यह दशा पुरुषों में अधिक होती है। स्त्रियों को अधिक आयु में विशेषकर Postmenopause की अवस्था में, उच्च रक्तचाप (high bp) से पीड़ित व्यक्तियों में, अधिक मद्यपान (alcoholics) करने वालों, मधुमेह (diabetes) से पीडित रोगियों मे मोटापे (obesity) से ग्रस्त लोगों मे तथा रक्ताल्पता (Sickle Cell Anemia) एवं वृक्कीय रोगों (kidney diseases) से पीड़ित लोगों में जीर्ण वातरक्त (Chronic Gouty Arthritis) की आशंकायें (risks) अधिक बनी रहती हैं।

  • ऐसी औषधियों के सेवन करने वाले व्यक्तियों में भी यह रोग अधिक होता है जो यूरिक एसिड उत्सर्जन में रूकावट हों।

रोग के लक्षण आमतोर पर तीव्र (acute gout) वातरक्त के समान ही होते हैं परन्तु जब यह स्थिति वर्षों तक बढ़ती-घटती हुई चलती रहती है तो जीर्ण दशा (Chronic Gouty Arthritis) कहलाती है।

Chronic Gouty Arthritis  रोग के निदान

  • रोग के निदान की पुष्टि के लिये वही परीक्षण कराये जाते हैं जो तीव्र वातरक्त के अन्तर्गत बताये गये हैं। यहाँ पर केवल एक्स-रे (x-ray) द्वारा भिन्न दशा यह दिखायी देती है कि रोगी का प्रभावित जोड़ (joint) नष्ट हुआ (Damaged) स्पष्ट दर्शाता है कि रोग जीर्ण अवस्था (chronic stage) में पहुँच चुका है।
  • रोकथाम के उपायों में ऐसी औषधियों का प्रयोग कराना चाहिये जो यूरिक एसिड की मात्रा को कम कर दे। ऐसा करना इस रोग में वृद्धि को रोक सकता है।

वातरक्त (gout) की पहली stage लक्षणरहित तथा तीसरी मध्यवर्ती stage उपरोक्त दोनों दशाओं से पहले की stages हैं जिन्हें डॉक्टर अपने अनुभव से पहचान सकते है तथा सही से निदान (diagnosis) कर सकते है।


रोग के कारण – यूरिक एसिड बढ़ने के कारण

प्राथमिक वातरक्त (gout) रोग एक वंशानुगत (hereditary) रोग है जो माता-पिता से सन्तान को विरासत में मिलता है। 50 से 80 प्रतिशत रोगियों को माता-पिता के कारण यह रोग होता है।

  • 4 वर्ष से कम आयु में यह रोग अधिक नहीं होता है। स्त्रियों में भी यह रोग अधिक नहीं होता है। पहले यह धारणा बनी हुई थी कि ऐसे भोजन जिनमें प्यूरीन की मात्रा अधिक हो, उनका प्रयोग करने से प्राथमिक वातरक्त होता है

किन्तु आजकल यह धारणा व कार्य नहीं है। यद्यपि प्यूरीनयुक्त भोजन (प्रोटीन- माँस आदि) के अधिक प्रयोग से ऐसे रोगियों में प्राथमिक वातरक्त (acute gouty arthritis) रोग हो सकता है जो इस रोग से शीघ्र ही ग्रस्त होने की गृहयता (Susceptibility) अपने अन्दर रखते हैं।

द्वितीय (secondary) आक्रमण (attack) के रूप में वातरक्त (gout) रोग अन्य विकारों की जटिलता (complications) के परिणामस्वरूप (result) भी हो सकता है जैसे कि…

  • पॉलीसाइथीमिया (Polycythemia)
  • श्वेतरक्ताल्पता (Leukemia) 
  • माइलोफाइब्रोसिस (Myelofibrosis) व् 
  • कुछ औषधियों के प्रयोग के बाद भी हो सकता है जैसे मूत्रदायक (diuretics) औषधियाँ थायाडायाज़ीन (Thadiazine) एवं फ्रूसेमाइड (Frusemide) के बाद द्वितीय वातरक्त (secondry gout) हो सकता है।

वातरक्त (gout) होने के कारण भोजन में कुछ निश्चित पदार्थों का ही ज्यादा प्रयोग करना तथा अल्कोहल (alcohol) का अधिक प्रयोग करना है। इसके अतिरिक्त चोट (injury) के कारण भी वातरक्त रोग का आक्रमण हो सकता है।

अत्यधिक व्यायाम (exercise) व् एक के बाद दूसरा संक्रमण (infection) तथा शल्यक्रिया (surgery) के बाद भी यह रोग हो सकता है।


रोग विज्ञान-यूरिक एसिड 

जोड़ के अन्दर तथा निकटस्थ ऊत्तकों (tissues) में यूरेट पदार्थ (Urates) इकट्ठा हो सकते हैं। कान के बाह्या कण्डरा अस्थि भाग (Cartilage) तथा वृक्कों (kidneys) में भी यूरेट पदार्थ इकट्ठा हो सकते हैं।

  • इस पदार्थ से वहाँ की हड्डी घुलने (dissolve) लगती है। एक्स-रे में रसूली के समान रचना दिखाई देती है। सन्धिरसीयकला में शोथ के समान क्रिया होती है

जैसे ही रोग वृद्धि होती है तो जोड़ कण्डरास्थि (Articular Cartilage) पतली होकर फट (burst) जाती है। यूरेट पदार्थ कण्डरा के नीचे वाली अस्थि तथा सन्धिरसीयकला पर भी इकट्ठा हो जाते हैं।

अन्त में अस्थि सन्धि मे विकार की स्थिति पैदा हो जाती है।

“यूरिक एसिड की रामबाण दवा-gout in hindi” पढ़ते रहें…


यूरिक एसिड के लक्षण (symptoms of gout in hindi)

वातरक्त (gout) की तीक्ष्ण दशा( acute stage) में 90 प्रतिशत रोगियों में पैर के जोड़ में रोग का attack होता है। इस रोग का आक्रमण अचानक ही होता तथा दर्द के कारण रोगी नींद से जाग जाता है।

जोड़ (joint) लाल रंग का, सूजा हुआ, गर्म तथा हाथ से छुने पर भी दर्द होता है।

  • रोगग्रस्त जोड़ (affected joint) में ऐसा प्रकट होता है जैसा कि किसी रोगाणु द्वारा पाक (pus) का फोड़ा बन गया है या स्थानीय त्वकशोथ (Cellulitis) हो गया है। जब एक मध्य आयु वर्ग के रोगी में इस प्रकार के लक्षण पहली बार दिखाई दें तो वातरक्त (gout) रोग के बारे में सोच विचार करना चाहिये।
  • ज्वर (fever), रक्त में श्वेत कणों की वृद्धि होना (Increase in TLC count) तथा उच्च ई.एस.आर. (E.S.R.) इस रोग की तीक्ष्णता को प्रमाणित करते हैं।
यूरिक एसिड की रामबाण दवा
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कुछ दिन के बाद पीडा कम हो जाती है। प्रभावित जोड़ के ऊपर की त्वचा का माँस उतरने और खुजली-सी होने लगती है।

रोग की शुरूआती स्थिति में इस रोग के आक्रमण दीर्घ मध्यान्तर के साथ होता हैं। दो आक्रमणों के बीच मे रोगी को कोई कष्ट और रोग के अन्य चिन्ह (signs) महसूस नहीं होते हैं। एक्स-रे में भी कोई बदलाव उस जोड़ में दिखाई नहीं देता है। रोग के आक्रमण के समय रक्त प्लाज्मा में यूरेट (Urates) की वृद्धि पाई जाती है किन्तु आक्रमण समाप्त होने पर मात्रा सामान्य हो जाती है।

जीर्ण वातरक्त (chronic gout) के लक्षण (यूरिक एसिड के लक्षण)

जीर्ण वातरक्त (chronic gout) की दशा में प्रभावित जोड़ (joint) में पीड़ा, कठोरता (stiffness) या अकड़न तथा विकृति स्थिर (permanent) हो जाती है।

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जोड़ के निकट के भागों में यूरेट की गाँठे बन जाती हैं जो टोफाई (Tophi) कहलाती हैं। इसी प्रकार की गाँठे कानों के कण्डरा भाग में भी दिखाई देती हैं।

  • मूत्र में यूरिक एसिड (Uric Acid) के अधिक मात्रा में निकलने से मूत्र संस्थान में पत्थरियाँ (kidney stones) बन जाती हैं।
  • बाद में धमनी कठोर (Atherosclerosis), उच्च रक्तचाप (हाइपरटेन्शन) तथा वृक्कीय विफलता (kidney failure) जैसी जटिलतायें हो जाती हैं।

प्रभावकारी चिकित्सा (effective treatments) के कारण आजकल वातरक्त की जटिलतायें बहुत ही कम देखी जाती हैं।


यूरिक एसिड मेडिसिन नाम तथा चिकित्सा-यूरिक एसिड की अंग्रेजी दवा बताएं

फिनाइल-बूटाज़ोन (Phenyl Butazone)– रोग की तीक्ष्ण दशा में फिनाइल-बूटाज़ोन (Phenyl Butazone) सर्वश्रेष्ठ औषधि है। जो 2-3 दिन तक प्रतिदिन 600 मि.ग्रा. तक, फिर घटाकर 300 मि.ग्रा. प्रतिदिन तक दी जाती है। जब तक कि पीड़ा समाप्त न हो जाये ।

हाइड्रोकोर्टिसोन तथा स्टीराइड जैसी औषधियों की आवश्यकता विशेष रोगियों में ही पड़ती है। जहाँ फिनाइल बूटाज़ोन असफल हो जाये या यह औषधि सहन न हो।

कॉल्चीसीन (Colchicine) -जो कि सूरन्जान नामक जड़ी-बूटी से तैयार की जाती है। यह बहुत ही प्रभावकारी है किन्तु यह वमन (vomiting) तथा अतिसार (diarrhoe) के दुष्प्रभाव पैदा करती है ।

इण्डोमैथासिन (Indomethacin) से लाभ के साथ तीव्र सिरदर्द (headache) तथा पाचन संस्थान से सम्बंदित साइड इफेक्ट्स  हो सकते हैं।

ऐसी औषधियों के लम्बे समय तक प्रयोग करने से जिनमें मूत्र में यूरिक एसिड का उत्सर्जन (excretion) होता हो, तीक्ष्ण प्रकार के रोग के आक्रमण कम हो जाते हैं।

  • रक्त में यूरेट की मात्रा कम हो जाती है, टोफाई के आकार में कमी आ जाती है तथा वृक्कीय क्षति (kidney damage) का risk भी कम हो जाता है।

Uricosuric agents-

इस प्रकार की उत्तम औषधियाँ प्रोबेनेसिड (Probenecid) 0.3 ग्राम प्रतिदिन 3 या 4 बार तथा सल्फिनपारायराज़ोन (Sulphinpyrazone) 200 से 400 मि.ग्रा. प्रतिदिन ये औषधियाँ यूरिकोस्यूरिक पदार्थ (Uricosuric Agents) कहलाती है।

इनका प्रयोग रोग की आरम्भिक stages में तीक्ष्ण रोग के आक्रमणों को कम करने के लिये कॉल्चीसिन 0.5 मि.ग्रा. के साथ प्रतिदिन तीन बार तक दे सकते हैं।

  • urate को कम करने के लिये अधिक से अधिक पानी या पेय पदार्थों का प्रयोग करना चाहिए, इससे urate तथा यूरिक एसिड गुर्दों में इकठा नहीं होता है। चूंकि एस्प्रीन से यूरेट तथा यूरिक एसिड का excretion कम हो जाता है अतः उपरोक्त औषधियों के साथ salicylates औषधियों का प्रयोग नहीं करना चाहिये।
  • Allopurinol औषधि जो सिप्लोरिक Ciploric Tab. (Cipla), एक्सूरिक Exuric Tab. (Martel Hammer) तथा जाइलोरिक Zyloric Tab. (B.W.) आदि व्यापारिक नामों से उपलब्ध है इसके सेवन से प्लाज्मा में यूरिक एसिड की मात्रा कम हो जाती है।

ये औषधियाँ अधिक घुलनशील हैं तथा युरिक एसिड की अपेक्षा जल्दी ही पेशाब द्वारा शरीर से उत्सर्जित (excrete) हो जाती हैं। urate की सीरम में मात्रा को सामान्य करने के लिए 300 से  400 मि.ग्रा. प्रतिदिन तक की आवश्यकता होती है। एक टिकिया 100 मि.ग्रा. की होती है।

यह औषधि विषैले प्रभावों से मुक्त बताई गई है। त्वचा पर केवल (Rashes) ही कभी-कभी प्रकट होते हैं। इन औषधियों के प्रयोग की अवधि में नीचे लिखी सावधानियाँ रखनी चाहिये।


सावधानियाँ (यूरिक एसिड की रामबाण दवा-gout in hindi)

इन औषधियों के प्रयोग से वातरक्त (gout) रोग में लाभ ना हो या औषधियाँ असह्य होने से एलर्जी हो तो सावधान रहें।

  • तीव्र प्रकार का वातरक्त रोग जिसमें टोफाई बन चुके हैं।
  • यूरिक एसिड की पत्थरियों का बार-बार बनना तथा
  • वृक्कीय (kidney  functions) कार्यों के विकार हो जाना।
  • श्वेत रक्ताल्पता (Leukemia) अथवा विषैले लिम्फार्बुद (Malignant Lymphomas) की चिकित्सा के समय जब यूरिक एसिड की अधिक मात्रा का उत्सर्जन (excretion) हो सकता है तो ऐसी स्थिति मे इन औषधियों के प्रयोगकाल में विशेष सावधानी रखनी चाहिये।
  • थोडा सा भी अनैच्छिक प्रभाव (unwanted effects) प्रकट हों तो तुरन्त चिकित्सा बन्द करके उनका निवारण किया जाना चाहिए तथा वातरक्त (gout) के रोग से छुटकारा दिलाने के लिये उपयुक्त औषधि का चुनाव करना चाहिये।

यूरिक एसिड में क्या नहीं खाना चाहिए

वातरक्त के रोगी के भोजन पर भी ध्यान देना चाहिये। यदि रोगी मोटा हो तो विशेष सावधानी रखें। यदि वातरक्त के आक्रमण कुछ मदिराओं, स्प्रिट या प्यूरिनयुक्त भोजन जैसे मीठे भोजन, माँस में यकृत (कलेजी), वृक्क (गुर्दे), दिमाग (भेजा), हृदय, छोटी-मोटी मच्छली (Fatty Fish), रोहू मच्छली तथा माँस का सूप आदि नहीं देना चाहिये।

क्षतिग्रस्त तथा विकृत जोड़ों के रोगियों में भौतिक चिकित्सीय सभी उपाय करने चाहिए, जैसा कि सन्धिवात की चिकित्सा में किया जाता है। जब टोफाई बडे हों तथा उनमें ज़ख़्म गये हों तो उनको काटकर अलग कर देना चाहिये।


Disclaimer (यूरिक एसिड की रामबाण दवा-gout in hindi)

इस आर्टिकल में दी गई नींद की दवाइयों की जानकारी केवल ज्ञान मात्र के लिए है

  • कृपया नीचे दी गई किसी भी अंग्रेजी दवाई को बिना डॉक्टर की सलाह बिल्कुल भी इस्तेमाल ना करें
  • क्योंकि इन दवाइयों के सेवन से कई प्रकार के शारीरिक तथा मानसिक दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं
  • बाकी यह दवाइयां डॉक्टर की पर्ची पर ही मिलती है इसलिए डॉक्टर की सलाह से ही इस्तेमाल की जानी चाहिए

इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद किसी भी दवा का इस्तेमाल अपनी मर्जी से करने से अगर कोई नुकसान होता है तो इसका जिम्मेदार वह व्यक्ति खुद होगा हमारी इसमें कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी

Information Compiled- by Dr Vishal Goyal

यूरिक एसिड की रामबाण दवा-gout in hindi

Bachelor in Ayurvedic Medicine and Surgery

Post Graduate in Alternative Medicine MD(AM)

Email ID- [email protected]

Owns Goyal Skin and General Hospital, Giddarbaha, Muktsar, Punjab

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सन्दर्भ: (यूरिक एसिड की रामबाण दवा-gout in hindi)

https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/gout/expert-answers/diuretics-and-gout/faq-20058146gout result of diuretics study

https://www.arthritis.org/health-wellness/healthy-living/nutrition/healthy-eating/which-foods-are-safe-for-goutpurine-rich foods study

https://www.webmd.com/arthritis/ss/slideshow-gouttophi formation in gout

https://www.kidney.org/atoz/content/gout/gout-kidney-diseasegout-kidney-disease link study

https://www.sciencedirect.com/topics/medicine-and-dentistry/uricosuric-agent- uricosuric-agent study

https://en.wikipedia.org/wiki/Probenecid- Probenecid role in gout

“यूरिक एसिड की रामबाण दवा-gout in hindi” पढने की लिए धन्यवाद…


 

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